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TMC सांसद का दावा- 1947 में वंदे मातरम के समय सब खड़े हुए, सिर्फ महात्‍मा गांधी बैठे रहे थे

बोस ने कहा कि मोदी सरकार महात्मा गांधी की बात तो करती है लेकिन इन बातों को कभी उजागर नहीं करती है।

राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (फाइल फोटो)

देशभर में जहां ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गन मन’ को लेकर पिछले कुछ समय से लोगों के बड़ी बीच बहस छिड़ी है, ऐमें तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुगाता बोस ने दावा किया है कि 1947 में कलकत्ता में आयोजित एक प्रार्थना सभा में वंदे मातरम गाए जाने के वक्त सभी लोग खड़े हो गए थे, जबकि राष्ट्रपिता महात्मा गाधी बैठे रहे थे। सुगाता बोस सांसद होने के साथ-साथ बतौर इतिहासकार भी जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने खड़े न होने का कारण भी बताया था। गांधी जी ने कहा था कि यह ‘यूरोपीय आयात’ के जैसा है।

1950 में जन गन मन को राष्ट्र गान और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के तौर पर देश ने अपनाया था। हाल ही में, संघ परिवार के प्रति सहानुभूति वाले वर्ग ने वंदे मातरम को देशभक्ति के लिए एक बैरोमीटर बनाने की मांग की थी।

द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक जाधवपुर यूनीवर्सिटी में कांग्रेस के इतिहास की चर्चा के दौरान बोस सहित अन्य इतिहासकारों ने ‘भारत का विभाजन: 70 साल बाद पुनर्विचार’ विषय पर अपने विचार रखे। बोस ने कहा- मैं यहां उस घटना के बारे में बताना चाहूंगा जब 1947 में गांधी जी की एक प्रार्थना सभा में बंगाल के आखिरी प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने भी उनके साथ स्टेज पर मौजूद थे। जब वंदे मातरम गाया गया तो हिंदू और मुसलमान सभी खड़े हो गए थे लेकिन महात्मा गांधी यह कहते हुए बैठे रहे कि भारतीय संस्कृति को ऐसी जरूरत नहीं है कि जब वंदे मातरम गाया जाए तो उसके सम्मान में खड़ा होना पड़े। यह एक यूरोपीय आयात है।

बोस ने कहा कि ऐसा करके गांधी जी ने देश को संप्रदायिक आग की खुराक दे दी थी जो पार्टीशन के बाद भड़की।

उनसे जब गोवा में सिनेमा हॉल में राष्ट्र गान के सम्मान में एक कवि के पीटे जाने की घटना का जिक्र करते हुए सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जब राष्ट्रपिता खुद बता चुके हैं कि केवल खड़े होकर ही इसके लिए सम्मान नहीं जताया जा सकता, आप बैठकर भी इसका सम्मान कर सकते हैं, फिर भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जब राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को पीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आप बलपूर्वक किसी में देशभक्ति नहीं भर सकते हैं। इसका अहसास खुद से करना होता है। हमारे राष्ट्र नेता महात्मा गांधी, नेता जी सुभाष चंद्र बोस और रविंद्रनाथ टैगोर सभी देशभक्त थे लेकिन वे सभी उग्र राष्ट्रवाद के खिलाफ थे।

बोस ने कहा कि मोदी सरकार महात्मा गांधी की बात तो करती है लेकिन इन बातों को कभी उजागर नहीं करती क्यों कि ऐसा करने से उसके  हित प्रभावित होंगे।

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