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नोटबंदी के बाद भक्तों ने बालाजी मंदिर में दान कर दिए चार करोड़ रुपये के पुराने नोट

मंदिर को हर साल 650 करोड़ रुपये की आय होती है। कई बैंको में मंदिर का 3000 किलो सोना जमा है।

Author March 3, 2017 12:25 PM
एक आंकड़े के मुताबिक मंदिर की कुलसंपत्ति लगभग 50,000 करोड़ है। (photo source- Indian express)

तिरूमला में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर के सामने एक विचित्र स्थिति खड़ी हो गई जब मंदिर के ट्रस्ट के अधिकारियों को पता चला कि बीते दो महीनों में यहां लगी हुंडी में लोगों ने चार करोड़ रुपये के 500 और 1000 रुपये के नोट दान किए हैं। अधिकारियों के सामने बड़ी समस्या ये है कि ये नोट, नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को बदलवाने के लिए तय अंतिम तारीख के बाद डाले गए। ट्रस्ट के एक अधिकारी ने आज बताया कि मंदिर प्रशासन ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को इस मामले में पत्र लिखा है। तिरूमाला तिरूपति देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी डी संबाशिवा राव ने बताया कि पुरानी मुद्रा में चार करोड़ रूपये से अधिक की राशि चढ़ाई गई है।

मंदिर के ट्रस्ट के अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के हर साल 1000 करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा आता। गोल्ड और सिल्वर को जोड़ दें तो ये राशि और भी अधिक हो जाती है। बता दें पीएम मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोट करने का ऐलान किया था। जिसके बाद से अफरा-तफरी मच गई थी। सरकार ने 30 दिसंबर 2016 तक 500 और 1000 रुपये के नोट हैं बैंको और डाकघरो में जमा कराने की इजाजत दी थी। बालाजी मंदिर में दिए गए नोट 30 नवंबर के बाद के हैं। इन नोटों को जमा कराने के लिए आरबीआई के पास जाना होगा।

तिरूमला में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर को देश की अमीर मंदिरों में गिना जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक मंदिर की कुलसंपत्ति लगभग 50,000 करोड़ है। मंदिर को हर साल 650 करोड़ रुपये की आय होती है। कई बैंको में मंदिर का 3000 किलो सोना जमा है। इस मंदिर में रोज लगभग 50,000 श्रृद्धालु दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर समुद्र तल से 2800 फिट की ऊंचाई पर बना हुआ। मंदिर के बारे में मान्यता है कि ये दुनिया के दूसरी सबसे प्राचीन पहाडियों पर बना है। इस मंदिर को तमिल राजा थोडईमाननें ने बनवाया था।

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