Delhi News: राजधानी दिल्ली की जेलों में लगातार बढ़ रही कैदियों की संख्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब नई जेल बनाने और मौजूदा जेल परिसरों का विस्तार करने के लिए जमीन की तलाश कर रही है। इसी उद्देश्य से हाल ही में ‘शहरी गांव’ घोषित किए गए 48 गांवों का सर्वे शुरू कराया गया है। इन गांवों में ऐसी जमीन की पहचान की जाएगी, जहां भविष्य में नई जेल बनाई जा सके या मौजूदा जेल व्यवस्था का विस्तार किया जा सके। इसके अलावा सरकार जेल कर्मचारियों के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान बनाने की भी योजना पर काम कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के महानिदेशक (जेल) कार्यालय ने इस सर्वे के लिए पांच अलग-अलग समितियों का गठन किया है। प्रत्येक समिति में चार सदस्य शामिल हैं। इन समितियों को 48 शहरी गांवों का दौरा कर उपलब्ध जमीन का सर्वे करने, उपयुक्त भूमि की पहचान करने, संबंधित सरकारी एजेंसियों से जमीन से जुड़ी जानकारी जुटाने और उसकी पुष्टि करने की जिम्मेदारी दी गई है। तय समय के भीतर सभी समितियां अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपेंगी।

राजधानी में तिहाड़, रोहिणी और मंडोली समेत तीन बड़े जेल परिसर हैं

दिल्ली की जेलों की मौजूदा स्थिति सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। राजधानी में तिहाड़, रोहिणी और मंडोली समेत तीन बड़े जेल परिसर हैं, जिनमें कुल 14 जेलें संचालित होती हैं। इनकी कुल स्वीकृत क्षमता 10,026 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में इनमें करीब 19,500 कैदी बंद हैं। यानी जेलें अपनी क्षमता से लगभग दोगुने कैदियों का बोझ उठा रही हैं। इससे जेलों में रहने की व्यवस्था, पानी की आपूर्ति, सीवर सिस्टम, कचरा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और कैदियों के पुनर्वास कार्यक्रमों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

तिहाड़ जेल दुनिया की सबसे बड़ी जेलों में गिनी जाती है। इसके बाद वर्ष 2004 में उत्तर-पश्चिम दिल्ली के बवाना-बादली क्षेत्र में रोहिणी केंद्रीय जेल बनाई गई थी, जबकि वर्ष 2016 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मंडोली में छह नई जेलों वाला एक बड़ा जेल परिसर शुरू किया गया। इसके बावजूद कैदियों की संख्या लगातार बढ़ने से मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह गई है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2024’ रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक दिल्ली की जेलों में क्षमता के मुकाबले 194.6 प्रतिशत कैदी मौजूद थे, जो देश में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, विचाराधीन कैदियों की संख्या के मामले में भी दिल्ली देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। बड़ी संख्या में अंडरट्रायल कैदियों के कारण जेलों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

दरअसल, मई 2025 में दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति ने राजधानी के बचे हुए 48 गांवों को ‘शहरी गांव’ घोषित करने का फैसला लिया था। इसके बाद इन गांवों पर दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम, 1954 के कृषि संबंधी प्रतिबंध लागू नहीं रहे। अब इन इलाकों की जमीन का उपयोग आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है। साथ ही इन गांवों की ग्राम सभा की भूमि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकार क्षेत्र में आ गई है।

इसी बदलाव के बाद सरकार ने इन शहरी गांवों को नई जेल परियोजना के लिए संभावित विकल्प के रूप में देखना शुरू किया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में दिल्ली जेल विभाग ने DDA को पत्र लिखकर करीब 400 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा 2025-26 के बजट में तिहाड़ जेल को मौजूदा स्थान से स्थानांतरित करने की घोषणा के बाद सामने आया था।

सरकार का मानना है कि नई जेल बनने और मौजूदा जेल परिसरों के विस्तार से न केवल तिहाड़ सहित अन्य जेलों में भीड़ कम होगी, बल्कि कैदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और जेल प्रशासन को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करना भी संभव हो सकेगा। अब सर्वे रिपोर्ट आने के बाद सरकार अगले चरण में जमीन चयन और नई जेल परियोजना पर अंतिम फैसला ले सकती है।

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भारत और म्यांमार में जातीय सशस्त्र गुटों से संबंध रखने और आतंकी साजिश के मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डायक को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है। अब दिल्ली की अदालत में याचिका दायर की गई है, जिसमें अदालत को यह बताया गया है कि मैथ्यू डायक जेल में अमेरिकी डाइट वाला खाना चाहता है। इस याचिका को लेकर अब जेल प्रशासन अपना जवाब दाखिल करेगा। दिल्ली की अदालत ने इससे पहले वैन डायक के एक आवेदन पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जवाब मांगा था। उसके वकील के अनुसार, वैन डायक कथित तौर पर लगभग 50 दिनों से भूख हड़ताल पर था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक