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दिल्ली मेरी दिल्ली: इजाजत की दरकार

डिया ने जब जेल प्रशासन के मुखिया से कैदियों का साक्षात्कार करने की इजाजत मांगी तो अधिकारी महोदय ने इसकी मंजूरी देने के बजाय कहा कि यह इतना आसान नहीं इसके लिए हमें भी मंजूरी लेनी पड़ती है।

Author April 15, 2019 5:56 AM
राजधानी के तिहाड़ जेल प्रशासन ने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस भी मुल्तवी कर रखी है।

-बेदिल

कई सालों से मीडिया से दूरी बनाए राजधानी के तिहाड़ जेल प्रशासन ने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस भी मुल्तवी कर रखी है। अचानक मीडिया को बुलाए जाने पर सवाल उठना लाजिमी था। जेल के मुखिया ने इस सवाल का जवाब पहले के अधिकारियों से पूछने को कहा। मीडिया ने जब जेल प्रशासन के मुखिया से कैदियों का साक्षात्कार करने की इजाजत मांगी तो अधिकारी महोदय ने इसकी मंजूरी देने के बजाय कहा कि यह इतना आसान नहीं इसके लिए हमें भी मंजूरी लेनी पड़ती है। इस पर मीडिया ने दूसरा सवाल दाग दिया कि जेल के मुखिया को किससे और क्यों इजाजत लेने की दरकार है? तब महोदय से कुछ कहते नहीं बना। वे बस इतना ही बोले कि जल्द ही कुछ इंतजाम करता हूं। इस पर मीडिया ने चुटकी ली कि कहीं उनका मतलब आलाकमान (मुख्यमंत्री) से मंजूरी लेना तो नहीं था।

पुलिस की व्यस्तता
दिल्ली में क्रिकेट मैच हो तो दिल्ली पुलिस सबसे ज्यादा व्यस्त हो जाती है। इन सबमें पुलिस के आला अधिकारियों की व्यस्तता और भी ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद रखने के साथ-साथ अपने आकाओं को भी खुश करना होता है। बीते दिनों बेदिल की एक पुलिस अधिकारी से बात हो रही थी। चर्चा के दौरान जैसे ही क्रिकेट मैच की बात आई, अधिकारी ने कहा कि क्रिकेट मैच में उन जैसे अधिकारियों की व्यस्तता कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। यह दीगर भी है क्योंकि क्रिकेट मैच में सुरक्षा व्यवस्था के अलावा मैच देखने आए वीआइपी और वीवीआइवी लोगों की आवभगत का जिम्मा तो आखिरकार पुलिस अधिकारियों को ही उठाना पड़ता है।

दरकिनार नेता
दिल्ली नगर निगम के नेताओं का इन दिनों कहीं ज्यादा मोलभाव नहीं है। लोकसभा चुनाव में उन्हें सिरे से दरकिनार कर दिया गया है। अब वे अपनी हिस्सेदारी मांग रहे हैं और काम पूछ रहे हैं। बेदिल को सत्तारूढ़ दल के ऐसे ही एक पार्षद ने बताया कि भले ही केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व उन्हें चुनाव में लगाए या नहीं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी तो बनती ही है। जब उनसे पूछा गया कि आखिर दरकिनार किए जाने के बाद आप किस तरह की हिस्सेदारी चाहते हैं तो वे बगलें झांकने लगे।

ऊपरवाला जाने
देश के विख्यात विश्वविद्यालयों में से एक दिल्ली विश्वविद्यालय ने बिना तैयारी ही शैक्षणिक सत्र 2017-20 के लिए दाखिला शुरू होने की तारीखें घोषित कर दीं, लेकिन अब उसे पीछे हटना पड़ रहा है। बेदिल को विश्वविद्यालय के ही लोगों ने बताया कि यहां कुछ भी सही नहीं चल रहा है। अभी यह भी नहीं पता है कि आगे कब दाखिला प्रक्रिया शुरू होगी। विद्यार्थी और उनके अभिभावक परिसर में जानकारी के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं और अधिकारी अपने दफ्तर में मौजूद ही नहीं रहते हैं। ऐसे में दाखिले किस तरह से होंगे ये तो ‘ऊपरवाला’ ही जाने।

शिकार की तलाश
यातायात पुलिस के कुछ अधिकारी पेड़ों के पीछे छुपकर अपने शिकार की तलाश में रहते हैं। गर्मी और धूप की वजह से चालान काटने वाले पुलिसकर्मी और अधिकारी पेड़ों की ओट में छुप जाते हैं, जिससे दूर से आ रहे वाहन चालकों को वे दिखाई नहीं देते। ऐसे में जब भी कोई वाहन नियमों की अनदेखी करता या लालबत्ती पार करता दिखता है, तो पुलिसवाले सड़क पर प्रकट हो जाते हैं और वाहन चालकों को चालान थमा देते हैं। दिल्ली में कई ऐसे ठिकाने हैं, जहां पर यातायात पुलिसकर्मी अपने निशाने की तलाश में पेड़ों के पीछे छुपे रहते हैं। कई बार वाहन चालकों को लगता है कि रास्ता साफ है, लेकिन उन्हें कहां पता होता होता कि आगे खतरा है।

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