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तिहाड़ के कैदियों ने तैयार किया हर्बल गुलाल

रंग खेलते समय किसी की अनुमति के बगैर उसपर रंगों का प्रयोग बिलकुल नहीं करें। ऐसा करना आपराधिक मामला बन सकता है। हमें आपस में रंग का कम से कम से प्रयोग कर हर्बल गुलाल का प्रयोग करना चाहिए ताकि किसी को कोई नुकसान नहीं हो।

तिहाड़ में डेढ़ हजार किलो गुलाल बनाया गया है जिसमें एक हजार किलो गुलाल बेचा जा चुका है।

अमलेश राजू

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में हुए दंगे और कोरोना विषाणु के संकट के बाद जहां कई संगठनों और लोगों ने होली न मनाने की घोषणा की है। इसके बावजूद बाजार में पिचकारी और गुलाल ने दस्तक दे दी है। बच्चे चीनी पिचकारी और केमिकल मिले रंग को खरीदने को बाध्य है। इसी उहापोह के बीच दिल्ली के तिहाड़ जेल ने हर्बल गुलाल का एक नया प्रयोग किया है। तिहाड़ में बंद कैदियों के हाथों बनाया गया यह गुलाल से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने का दावा किया जा रहा है। कैदियों ने करीब डेढ़ हजार किलो गुलाल तैयार कर दिल्ली वालों को हर्बल होली की ओर आने को प्रेरित किया है।

तिहाड़ जेल के आइजी राज कुमार के मुताबिक इस गुलाल को बनाने के लिए किसी भी रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह बिलकुल प्राकृतिक चीजों से बनाया गया है। कुमार के मुताबिक इस गुलाल की सबसे खास बात यह है कि इसका त्वचा के लिए हानिकारक नहीं है। इस हर्बल गुलाल से होली खेलने से सौहार्द का वातावरण बनेगा। अक्सर लोग केमिकल वाले गुलाल का इस्तेमाल करते हैं जिससे दूसरे व्यक्ति को नुकसान होता है। उनका कहना है कि होली खेलने के लिए हर्बल गुलाल का प्रयोग करना चाहिए। इस बार तिहाड़ में डेढ़ हजार किलो गुलाल बनाया गया है जिसमें एक हजार किलो गुलाल बेचा जा चुका है। जो कि करीब 50 हजार रुपए में बिका। हर्बल गुलाल का सबसे बड़ा फायदा है कि यह त्वचा के लिए बिलकुल सुरक्षित है।

तिहाड़ से सटे हरिनगर, उत्तमनगर, जनकपुरी से यह गुलाल खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लग गई है। उधर रंगों का त्योहार होली में बाजार पूरी तरह सज चुका है। रंग और पिचकारी के लिए लोगों की भीड़ को बाजार में देखा जा सकता है। इस भीड़ में चीनी पिचकारी और केमिकल से लेस रंग खुलेआम बिक रहे हैं।

रंग खरीदते समय इन बातों का रखें ख्याल

सफदरजंग में रेजिडेंट डाक्टर रहे डॉ अमित कुमार कहते हैं कि होली पर हम सभी जानते हैं कि बाजार में कई तरह के केमिकल वाले रंग बिकते हैं। जो कि हमारी त्वचा के लिए बिलकुल भी सही नहीं हैं। ऐसे में हमें हर्बल रंगों का चुनाव करना चाहिए। लेकिन हर्बल रंगों की पहचान कैसे करें। रंगों की खरीदारी करते हुए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे दुकानदार हमें केमिकल वाले रंग देकर ठग ना पाए। रंगों के पैकेजिंग पर उसे बनाने में उपयोग हुई सामग्रियों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। अगर उसमें यह लिखा है कि रंग का निर्माण गुलाब, हल्दी आदि सामग्रियों को लेकर तैयार किया गया है तो वह रंग प्राकृतिक होगा। केमिकल वाले रंगों में स्पार्कल (चमकीला पदार्थ) होता है जिससे ये रंग काफी चमकीले दिखते हैं। चमकीलेपन से इसका पता दूर से ही देखकर लगाया जा सकता है। ऐसे में खरीदारी के दौरान आप रंगों को हाथ में उठाकर देखें कि उसमें स्पार्कल तो नहीं है। प्राकृतिक रंग हल्के होते हैं।

राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रेजिडेंट डाक्टर रही डॉ रजनी सिंहा कहती हैं कि अगर आपको यह पता करना है किन-किन रंगों के प्रयोग से आपकी त्वचा पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में आपको अपना स्किन पैच टेस्ट कराना चाहिए। आपको पता चल जाएगा किस तरह के रंगों से आपकी स्किन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही रंगों की खरीदारी के दौरान इस बाा का जरूर ध्यान रखिए कि उस पर एक्सपायरी डेट लिखी हुई है या नहीं। प्राकृतिक रंगों में प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इसकी एक्सपायरी डेट छह से सात महीने की होती है।

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