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केंद्र ने म.प्र. सरकार से कहा, ‘मोगली भूमि’ में बाघ सफारी रोकें

पेंच राष्ट्रीय उद्यान ‘मोगली’ के घर के तौर पर विख्यात है। ‘मोगली’ रुडयार्ड किपलिंग के ‘द जंगल बुक’ का नायक है।

नई दिल्ली | Updated: May 30, 2016 6:46 PM
पेंच बाघ अभयारण्य या बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में सफारी के निर्माण के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने वन्यजीव नियमों के कथित उल्लंघन का उल्लेख करते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग से राज्य के पेंच राष्ट्रीय उद्यान में बाघ सफारी रोकने के लिए कहा है। पेंच राष्ट्रीय उद्यान ‘मोगली’ के घर के तौर पर विख्यात है। ‘मोगली’ रुडयार्ड किपलिंग के ‘द जंगल बुक’ का नायक है। सीजेडए ने राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन को लिखे एक पत्र में कहा है कि उसकी पूर्व अनुमति के बिना कोई भी सफारी का निर्माण नहीं होगा।

पत्र में लिखा है, ‘सीजेडए के रिकॉर्ड के अनुसार पेंच बाघ अभयारण्य या बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में सफारी के निर्माण के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। इसलिए कोई भी निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए।’ यह कदम महत्व रखता है क्योंकि कई वन्यजीव कार्यकर्ता पेंच और बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में बाध सफारी निर्माण पर आपत्ति जता रहे थे। कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह बाघों के लिए नुकसानदायक है।

इससे पहले राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने इन दो राष्ट्रीय उद्यानों में बाघ सफारी निर्माण में कानून का कथित उल्लंघन पाया था। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय एनटीसीए ने राज्य सरकार को भी पत्र लिखा था और कहा था कि पेंच के भीतर बाघ सफारी का जारी निर्माण ‘बाघ प्रसार के लिए हानिकारक’ है और वह ‘उन्हें शिकार के लिए दृष्टिगोचर करता है।’

मध्य प्रदेश के वन विभाग ने पेंच और बांधवगढ़ में बाघ सफारी निर्माण से पहले सीजेडए से ‘पूर्व अनुमति’ नहीं ली। एक वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा, ‘सीजेडए का यह निर्णय स्वागत योग्य है। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार बाघ अभयारण्य में तत्काल निर्माण कार्य रोक दे।’

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