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अब सैन्य बलों के तीन नए कमान होंगे

सैन्य बलों के तीन नए कमान गठित किए जाएंगे। भविष्य में युद्ध के तौर-तरीकों के ध्यान में रख कर यह फैसला किया गया है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 23, 2017 12:40 AM
(express File Pic)

दीपक रस्तोगी

सैन्य बलों के तीन नए कमान गठित किए जाएंगे। भविष्य में युद्ध के तौर-तरीकों के ध्यान में रख कर यह फैसला किया गया है। इसके लिए भारतीय सेना के नए ढांचे का स्वरूप तय कर लिया गया है। अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और विशेष अभियानों के लिए नए कमान गठित किए जाएंगे। ये तीनों एकीकृत कमान होंगे।
साथ ही सैन्य बलों के कमांडरों का अध्यक्ष पद सृजित करने के फैसले पर भी मुहर लग गई है। अध्यक्ष पद सेना के मौजूदा प्रमुख के समकक्ष होगा, जो परमाणु हथियारों को भी नियंत्रित करेगा। देहरादून में रविवार को समाप्त हुए दो दिवसीय सैन्य कमांडरों की बैठक में ये अहम फैसले किए गए हैं। ये फैसले साल भर के भीतर लागू कर दिए जाएंगे। बैठक में चीन और पाकिस्तान की सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की विशेष तैयारियों को लेकर भी कई बड़े फैसले किए गए हैं। जनसत्ता ने अपने 14 जनवरी के अंक में ‘सैन्य कमांडरों का अध्यक्ष पद बनाने की तैयारी’ श्ीार्षक से छपी खबर में इन तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। सेना कमांडरों की बैठक में प्रशिक्षण, आपूर्ति तैयारियों, योजना और खरीद को लेकर भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर मंथन किया गया। इसमें किए गए फैसलों के बारे में गोपनीयता बरती जा रही है। सम्मेलन में सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों- बाकी पेज 8 पर जनरल बिपिन रावत, एडमिरल सुनील लांबा, एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ, सभी 19 कमांडरों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी भी शामिल हुए।

सेना के नए प्रमुख जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति में लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी की वरिष्ठता के उल्लंघन का मामला उछला था। आधिकारिक तौर पर नया पद सृजित होने के बाद सेना के प्रमुखों के अध्यक्ष पद पर लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी को लाने की बात चल रही है। अध्यक्ष (चीफ्स आॅफ स्टाफ कमेटी) पद को सेना के तीनों प्रमुखों के समकक्ष रखा गया है और वहां बैठने वाले कमांडर भी अन्य तीनों की तरह चार स्टार जनरल होगा। इस पद पर बैठा कमांडर सरकार और सैन्य बलों के बीच संपर्क सूत्र होगा। सेना की जरूरतों, खरीद और संसाधनों के इस्तेमाल का फैसला तीनों प्रमुखों के साथ तालमेल कर करेगा।
सेना कमांडरों के अध्यक्ष पद के अलावा बड़ा फैसला तीन नए कमान बनाने का है, जो भविष्य के युद्ध की रूपरेखा और चुनौतियों के मद्देनजर किया गया है। अंतरिक्ष (स्पेस), साइबर सुरक्षा (साइबर स्पेस) और विशेष अभियानों (स्पेशल आॅपरेशंस) के लिए नए कमान बनाए जाएंगे। अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा कमान में पांच लाख आईटी विशेषज्ञों को भर्ती करने की योजना है।

भारतीय सेना के पास अभी 17 एकल कमान (थल सेना के सात, वायुसेना के सात और नौसेना के तीन) हैं, जो थल सेना, वायु सेना और नौसेना के मातहत काम करते हैं। दो एकीकृत कमान हैं- अंडमान एवं निकोबार कमान (एएनसी) और रणनीतिक बल (स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमान, एसएफसी)। एसएफसी के पास तीनों अंगों की जरूरत के मद्देनजर देश के परमाणु आयुधों की जिम्मेदारी है। एएनसी पोर्ट ब्लेयर में समुद्री और भौगोलिक सुरक्षा की जिम्मेदारी वाला कमान है।
सेना के तीनों अंगों की कमान एक जगह लाने की योजना लागू कर खर्च घटाने की तैयारी की जा रही है। उदाहरण के लिए थल सेना, वायु सेना और नौसेना की पूर्वी कमान के मुख्यालय क्रमश: कोलकाता, शिलांग और विशाखापत्तनम् में हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और चीन समेत 70 देशों की तरह ऐसे मुख्यालयों को एक जगह करने की कवायद भारत भी कर रहा है। दरअसल, विभिन्न युद्धों के बाद सेना के एकीकृत कमान की बात उठती रही है। 1999 में थल सेना और वायु सेना के कमांडरों के बीच कार्रवाई को लेकर मतभेद की खबरें आई थीं। इसके बाद 2001 में मंत्रिमंडलीय समूह ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा बलों के प्रमुख (सीडीएस) का पद बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद एएनसी और एफएफसी बनाए गए। 2012 में नरेश चंद्रा टास्कफोर्स ने सैन्य बलों के प्रमुखों का पद बनाने की बात कही। 2016 में लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकटकर कमेटी ने इसी तरह के सुझाव दिए।

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