हरियाणा में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, भाजपा और इनेलो के तीन नेता कांग्रेस में हुए शामिल

ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे पवन बेनीवाल, हिसार से भाजपा नेता और उद्यमी अशोक गोयल मंगालीवाला, पूर्व सांसद तारा सिंह के पुत्र और इनेलो नेता कंवलजीत सिंह उर्फ़ प्रिंस पार्टी में शामिल हुए।

Haryana Congress
कांग्रेस के नई दिल्ली कार्यालय में शामिल हुए तीनों नेता। फोटो सोर्स – @kumari_selja

भाजपा और इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के हरियाणा के तीन नेता सोमवार को कांग्रेस में शामिल हुए। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी सैलजा और प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल की मौजूदगी में इन नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली। राज्य के ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे पवन बेनीवाल, हिसार से भाजपा नेता और उद्यमी अशोक गोयल मंगालीवाला, पूर्व सांसद तारा सिंह के पुत्र और इनेलो नेता कंवलजीत सिंह उर्फ़ प्रिंस पार्टी में शामिल हुए।

कुमारी सैलजा ने कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए तीनों नेताओं का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘आज प्रदेश सरकार में शामिल लोगों की हिम्मत नहीं है कि वह जनता के बीच जा सकें। आज हर वर्ग की पसंद कांग्रेस पार्टी है। यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी का जनाधार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में जब भी चुनाव होंगे कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘हरियाणा प्रदेश बेरोजगारी के मामले में पूरे देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। आए दिन घोटाले सामने आ रहे हैं। सरकार आए दिन किसान विरोधी फैसले ले रही है। किसान पिछले नौ महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मगर यह सरकार उनकी आवाज को दबाने के लिए लगातार दमनकारी नीतियां अपना रही है।’’

आंदोलनकारी किसानों पर बरसे: एक तरफ किसानों के मामलों को देखते हुए पार्टी के नेता दूसरी नाव में सवार हो रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ किसानों के प्रति हरियाणा बीजेपी के तेवर आक्रामक होते जा रहे हैं। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी मौजूदा आंदोलन का नेतृत्व करने वाले किसान नेताओं पर बरसते हुये हरियाणा के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओ पी धनखड़ ने सोमवार को कहा कि यह आंदोलन ‘‘अब पूरी तरह राजनीतिक’’ है और किसानों के कल्याण से इसका कोई लेना देना नहीं है।

जब उनसे पूछा गया था कि किसानों ने कहा है कि वह प्रदेश में भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों का विरोध करते रहेंगे। उन्होंने कहा,‘‘यह आंदोलन अपने मूल एजेंडे से आगे जा चुका है। (आंदोलन में शामिल) किसान नेता पहले कहा करते थे कि वह इन कानूनों में सुधार चाहते हैं। लेकिन जब यह मामला उठा तो, उन्होंने अपनी मांग का रास्ता बदल दिया और इसे वापस लेने की मांग करने लगे।’’

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