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जेल में खूंखार कैदियों को प्रतिबंधित नशीले पदार्थ मुहैया कराने वाले होमगार्ड के तीन जवानों को दबोचा

यहां की विशेष केंद्रीय कारा (कैंप जेल) में कैदियों को चोरी छिपे आपत्तिजनक सामान देने के लिए ले जाते होमगार्ड के तीन जवानों को जेल अधिकारियों ने दबोच लिया। इन्हें गिरफ्तार कर इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के वास्ते जेल अधीक्षक ने थाना तिलकामांझी को लिखित आवेदन दिया है।

यहां की विशेष केंद्रीय कारा (कैंप जेल) में कैदियों को चोरी छिपे आपत्तिजनक सामान देने के लिए ले जाते होमगार्ड के तीन जवानों को जेल अधिकारियों ने दबोच लिया। इन्हें गिरफ्तार कर इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के वास्ते जेल अधीक्षक ने थाना तिलकामांझी को लिखित आवेदन दिया है। होमगार्ड के तीनों जवान अनुबंध पर जेल के प्रथम खंड में खूंखार कैदियों की निगरानी के लिए तैनात थे। थाना तिलकामांझी पुलिस पशोपेश में है। कि खैनी , पान मसाला (गुटखा) और गुल मंजन जैसी सामग्री ले जाने के जुर्म में कौन सी दफा लगाई जाए। सिटी डीएसपी राजवंश सिंह कहते है कि इन पर जेल मैनुअल के तहत जेल प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। वैसे पुलिस मामले को देख रही है।

यों जेल अधीक्षक रविंद्र कुमार चौधरी बताते है कि इस सिलसिले की जानकारी होमगार्ड के कमांडेंट समेत भागलपुर के ज़िलाधीश और पटना जेल के आलाधिकारियों लिखित भेजी है। जिसमें लिखा है कि ऐसे जवानों को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए।

दरअसल होमगार्ड जवान राजकिशोर सिंह , सीताराम यादव और परमानंद यादव अपनी ड्यूटी पर जाने के वास्ते सोमवार को दोपहर जेल गेट में प्रवेश करने लगे। इसी दौरान इनकी तलाशी जेल के कक्षपाल ने ली। तो इनकी टोपी , जूते के सोल और अंडरपेंट में तीनों के पास से गुटखा , खैनी और गुल की कई पुड़िया बरामद हुई। इनलोगों ने टोपी की सिलाई और जूते के सोल को काटकर उसमें ये प्रतिबंधित सामान छुपा रखा था। जेल के सिपाही ने इन तीनों को जेल अधीक्षक के सामने पेश कर सारी बातें बताई।

सूत्र बताते है कि जेल अधिकारियों को पहले से इनपर शक था कि कैदियों को मादक पदार्थ मुहैया पैसों के लालच में कराते है। ऐसे भी जेल नियमों के मुताबिक कैदियों को ही नहीं जेल ड्यूटी के दौरान किसी भी सिपाही को खैनी , पान मसाला का उपयोग करने की मनाही है।

पुलिस ने मंगलवार को खबर लिखे जाने तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। पुलिस का कहना है कि जेल मैनुअल के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इन होमगार्ड के तीनों जवानों का अनुबंध खत्म कर देना ही बड़ी सजा है। बहरहाल इसी पेशोपेश में आगे की कार्रवाई लटकी है।

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