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शिवसेना ने ‘एल्गार सम्मेलन’ की अलकायदा से की तुलना

शिवसेना ने सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद आनंद तेलतुम्बडे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का बुधवार को समर्थन किया और पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के सम्मेलन से जुड़े लोगों की कार्यशैली की तुलना आतंकवादी संगठन अल-कायदा से संबद्ध लोगों से की।

Author मुंबई/पुणे | February 7, 2019 10:24 AM
तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Photo: Twitter@ShivSena)

शिवसेना ने सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद आनंद तेलतुम्बडे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का बुधवार को समर्थन किया और पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के सम्मेलन से जुड़े लोगों की कार्यशैली की तुलना आतंकवादी संगठन अल-कायदा से संबद्ध लोगों से की। इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तेलतुम्बडे ने कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाये गए हैं। शिवसेना ने कहा कि पुलिस प्रशासन और कानून पर निरंतर हमला करना, सरकार पर प्रश्नचिह्न लगाना, व्यवस्था के मनोधैर्य को तोड़कर उसे लंगड़ा बनाने की अलकायदा की रणनीति है।  शिवसेना ने समाचारपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘‘एल्गार परिषद का समर्थन कर रहे लोगों की भी यही रणनीति है।’’ उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने कहा कि दलित नेता प्रकाश आम्बेडकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवादी संगठन कहते हैं लेकिन संघ एक प्रखर राष्ट्रवादी संगठन है।

शिवसेना के आरोप पर तेलतुम्बडे ने कहा, ‘‘…उन्होंने प्रत्येक संभव वे आरोप लगाये हैं जो मेरे जैसे व्यक्तियों पर लगाये जा सकते हैं। हमारे जैसे लोगों के साथ जो भी हो रहा है वह तर्क से परे है। उन्होंने झूठे आरोप लगाये हैं। ये लोग हमारे साथ जो भी कर रहे हैं वह सहनशीलता से परे है।’’ तेलतुम्बडे एल्गार परिषद-कोरेगांव भीमा मामले में आरोपी हैं। पुलिस ने उन पर माओवादियों से तार जुड़े होने का आरोप लगाया है। एक जनवरी, 2018 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के पास कोरेगांव-भीमा गांव में ंिहसक संघर्ष के बाद मामला दर्ज किया गया था।

उन्हें मामले में पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था और एक सत्र अदालत के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया था। पुणे पुलिस के अनुसार एल्गार परिषद के कार्यक्रम में भड़काऊ भाषणों के बाद अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क गयी थी।  पुलिस के अनुसार, माओवादियों ने कार्यक्रम का खर्च उठाया था और इसे समर्थन दिया था। शिवसेना ने लिखा, ‘‘कोरेगांव-भीमा दंगों ने समाज में विभाजन पैदा कर दिया है जहां दलितों पर हमले हुए। बगावत के बीज बोना, इस तरह का साहित्य बनाना और उसका प्रसार करना तथा इसके लिए पैसा इकट्ठा करना दरअसल माओवादी बुद्धिजीवियों का काम है। अल-कायदा और एल्गार से जुड़े बुद्धिजीवियों के काम करने का तरीका एक जैसा है।’’

पार्टी ने कहा कि हत्या, भ्रष्टाचार और नरसंहार जैसे आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोग कई बार बरी हो जाते हैं, जिसका यह मतलब नहीं है कि वे बेगुनाह हैं और तेलतुम्बडे के समर्थकों को यह जान लेना चाहिए। शिवसेना ने दावा किया कि कुछ गंभीर ‘राष्ट्रविरोधी गतिविधियों’ की साजिश रची जा रही थी और पुलिस को अपराधी के तौर पर प्रर्दिशत करना इस तरह की साजिश की शुरूआत थी। पार्टी ने कहा कि यह पुलिस के साथ दृढ़ता के साथ खड़े होने का सही समय है।

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