ताज़ा खबर
 

BLOG: बुरहान वानी की मौत अंत नहीं एक शुरुआत, और खतरनाक हो जाएंगे घाटी के हालात

बुरहान ने आतंक के चेहरे पर लगे मास्‍क को उतार फेंका। उसने खुद की पहचान एक स्‍थानीय के तौर पर कायम की, जो तराल का रहने वाला था। उसने युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल किया।

Author श्रीनगर | July 9, 2016 7:08 PM
बुरहान की मौत घरेलू आतंकवाद को रफ्तार दे सकती है। इसकी वजह से आतंकियों की नई भर्तियों को बढ़ावा मिल सकता है।

घाटी का मोस्‍ट वॉन्‍टेड आतंकी बुरहान मुजफ्फर वानी जम्‍मू पुलिस और राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के ज्‍वाइंट ऑपरेशन में मारा गया। ऊपरी तौर पर इस घटना को सुरक्षबलों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। हालांकि, घाटी के वर्तमान हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आतंकवाद के इस नए दौर में इस घटना की वजह से हालात और खराब हो सकते हैं। बुरहान जिंदा रहते हुए घाटी में उपजे नए आतंकवाद का पोस्‍टर ब्‍वॉय बन गया । वो आतंकवाद, जिसमें 90 के दशक के बाद पहली बार घाटी के शिक्षित युवाओं ने हथियार उठाए। उन्‍होंने स्‍थानीय स्‍तर पर खुद को ट्रेन्‍ड किया और जंग में उतर आए। उन्‍होंने इस काम को एक ‘पेशे’ के तौर पर देखा है। राजनीतिक समीक्षक और सुरक्षा एक्‍सपर्ट मानते हैं कि बुरहान की मौत घरेलू आतंकवाद को रफ्तार दे सकती है। इसकी वजह से आतंकियों की नई भर्तियों को बढ़ावा मिल सकता है।

1990 में पहले चरण के बाद, कश्‍मीर में आतंकियों की गतिविधियों में दो बड़े बदलाव आए। पहला स्‍थानीय भागीदारी में कमी आई और हरकत उल मुजाहिद्दीन, लश्‍कर ए तैयबा, अल बद्र, जैश ऐ मोहम्‍मद जैसे गैर स्‍थानीय आतंकी संगठनों का दबदबा बढ़ा। इसकी वजह से, जो मुठभेड़ हुए उसमें मारे जाने वाले आतंकी स्‍थानीय लोगों के लिए अपरिचित चेहरे थे। इसकी वजह यह थी कि मारे जाने वाले आतंकियों के जो नाम सामने आते थे, वे अधिकतर उनके alias या उपनाम होते थे। भले ही इस दौर में स्‍थानीय लोगों ने भी ऐसे ग्रुप ज्‍वाइन किए, लेकिन यहां के आतंकवाद का तानाबाना गैर स्‍थानीय ही रहा।

Read Also: बुरहान के मारे जाने पर उमर अब्‍दुल्‍ला ने कहा- कश्‍मीर के नाराज लोगों को नया नायक मिल गया

बुरहान ने यह सब बदल कर रख दिया। उसने आतंक के चेहरे पर लगे मास्‍क को उतार फेंका। उसने खुद की पहचान एक स्‍थानीय के तौर पर कायम की, जो तराल का रहने वाला था। इसके बाद, उसने युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल किया। उसने उन युवाओं की पहचान की, जो ‘कभी न खत्‍म होने वाले राज्‍य के सैन्‍यीकरण’ से बेहद नाराज थे। उसने अपनी सेल्‍फीज पोस्‍ट कीं। यहां तक कि छिपे रहने के दौरान भी वीडियोज शेयर किए। हाल ही में वो एक वीडियो में नजर आए, जिसमें उसने युवा कश्‍मीरियों को आतंकवाद से जुड़ने का आह्वान किया।

Read Also: J&K: आतंकी बुरहान के जनाजे में उमड़े 40 हजार लोग, पाकिस्‍तान के झंडे भी आए नजर

1990 के बाद बुरहान ऐसा पहला आतंकी था, जो कश्‍मीर के हर आम घर में एक परिचित नाम बन गया। शुरुआत में इसलिए क्‍योंकि लोग उससे और उसकी कहानियों से खुद को जुड़ा महसूस करते थे। उसकी कहानी उसके गृह नगर के घर घर में मशहूर हो गईं। यह कहानी कुछ ऐसी थी-एक शाम बुरहान अपने भाई खालिद और एक दोस्‍त के साथ मोटरसाइकिल पर घूमने गया। जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के स्‍पेशल ऑपरेशन ग्रुप के सुरक्षाकर्मियों ने उनकी पिटाई की। उसका भाई सड़क पर बेहोश हो गया। बुरहान और उसके दोस्‍त फरार हो गए। इस घटना ने बुरहान की जिंदगी बदलकर रख दी। 15 साल का बुरहान दसवीं का स्‍टूडेंट था। 2010 में उसने आतंकवादी बनने के लिए घर छोड़ दिया।

Read Also: बुरहानी वानी के मारे जाने से घाटी में तनाव, मोबाइल इंटरनेट बंद, यूजीसी नेट परीक्षा टला

बुरहान बेहद शिक्षित परिवार से थे। उसके पिता मुजफ्फर अहमद वानी गणित के अध्‍यापक हैं। वह एक हायर सेकेंडरी स्‍कूल में प्रिंसिपल हैं। उसकी मां मोइमूना मुजफ्फर एक पोस्‍ट ग्रेजुएट हैं। पिछले साल मारा गया बुरहान का भाई खालिद के पास एमकॉम की डिग्री थी। बुरहान का एक और छोटा भाई और बहन हैं, जो स्‍टूडेंट हैं। घाटी में जो इस नए आतंकवाद का उदय हुआ है, जो सरकार के उन तरीकों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके जरिए उसने 2008 और 2010 की गर्मियों में हुए नागरिकों प्रदर्शनों को कुचला था। इनमें बहुत सारे प्रदर्शनकारी मारे गए थे। इसके बाद बुरहान वानी घाटी के आक्रोश का चेहरा बन गया।

खुद के फैसले लेने की मांग के अलावा, धर्म एक दूसरा अहम कारण है, जिसने घाटी के युवाओं को प्रेरित करने का काम किया। ऐसे में जब दक्षिणी कश्‍मीर में जमीनी आधार वाली पार्टी पीडीपी ने खुद के शासन का वादा करते हुए बीते साल बीजेपी से हाथ मिला लिया तो इससे कश्‍मीरी की कहानी दोबारा से बेरंग हो गई। ऐसे राजनीतिक हालात बने, जहां गुस्‍सा और विरोध स्‍थानीय युवाओं के आतंकी ग्रुप ज्‍वॉयन करने की वजह बना।

Read Also: बुरहान वानी 15 साल की उम्र में बन गया था आतंकी, सेना के कपड़े पहनता और FB पर रहता एक्टिव

दक्षिण कश्‍मीर के एक पुलिस अफसर ने कहा कि बुरहान इस दौर के आतंकवाद के लिए कुछ ऐसा ही था, जैसे कि पिछली पीढ़ी में 1990 में मारा गया जेकेएलएफ का कमांडर इशफाक मजीद। अधिकारी ने कहा, ‘उसके (इशफाक) के इर्दगिर्द न जानें कितनी कहानियां गढ़ी गईं। वह पूरे क्षेत्र में एक हीरो बन गया था। बीते 15 साल से कश्‍मीरी युवा आतंकी संगठनों में जाने से दूर रह रहे थे। जिसने जुड़ने की पहल भी की, वे महज जमीनी कारिंदे या कूरियन ब्‍वॉय बनने तक सीमित रहे। बुरहान ने आतंकवाद को दोबारा से युवाओं से जोड़ दिया। शुरुआत में स्‍थानीय युवा आतंकी संगठनों में जाने के बाद ट्रेनिंग के लिए सीमा पार भेजे जाते थे। बुरहान के मशहूर होने के बाद हमने एक नए हालात का सामना किया। इस वक्‍त दक्षिणी कश्‍मीर में 60 से ज्‍यादा स्‍थानीय आतंकी सक्रिय हैं। इन सब की ट्रेनिंग स्‍थानीय तौर पर हुई है।’

सूत्रों का कहना है कि जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस बीते दो महीने से बुरहान के गतिविधियों पर नजर रखे हुई थी। वो अनंतनाग में होने वाले उप चुनावों का इंतजार कर रही थी। यहां से खुद सीएम महबूबा मुफ्ती मैदान में थीं। अधिकारी ने बताया, ‘बुरहान को खत्‍म करने का फैसला किया जा चुका था। मुझे इस बात में कोई शक नहीं है कि उसकी मौत युवाओं में और गुस्‍सा भरने का काम करेगी। गिरफ्तार किए जाने के बजाए उसे खत्‍म करने से स्‍थानीय युवाओं के आतंकी संगठनों में जाने को बढ़ावा मिलेगा।’

Read Also: कश्मीर: घाटी में आतंकवाद का चेहरा बना बुरहान वानी मारा गया

बुरहान का प्रभाव शुरुआत में सिर्फ दक्षिणी कश्‍मीर तक सीमित था। अब यह पूरी घाटी में फैल गया। सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी इसकी वजह है। अधिकारी ने कहा, ‘देर से ही सही, उत्‍तरी कश्‍मीर में हालात बदलने लगे थे। देखिए कि अब कुपवाड़ा में क्‍या हो रहा है। हम हर शुक्रवार को पथराव और प्रदर्शन देखते हैं। लोलाब में सेना के एक कथित खबरी के घर पर हमला हुआ। ऐसा लंबे वक्‍त से नहीं हुआ है।’ अफसर ने कहा, ‘युवाओं में गुस्‍सा बहुत है। इसके अलावा, काफी बेचैनी भी है। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि तराल में उसके जनाजे के वक्‍त क्‍या होगा। अगर कुछ मौतें और हुईं तो यह नए सिरे से प्रदर्शनों की एक और शुरुआत होगी। बुरहान ने जो शुरू किया, वो उसकी मौत के साथ नहीं खत्‍म होगा। उसकी मौत ने बहुत कुछ नया शुरू कर दिया है।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App