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सर्वे में खुलासा, 40 फीसद किशोरियां खुले में शौच के लिए मजबूर

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां 40 फीसद लड़कियां आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं वहीं, केवल 46.3 फीसद ग्रामीण लड़कियों को माहवारी के दौरान स्वच्छ तरीके उपलब्ध हैं।

देश की कुल 46 फीसद किशोरियां माहवारी के दौरान अस्वच्छ तरीके अपनाने को मजबूर। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खुले में शौच से मुक्ति अभियान के बावजूद देश की 40 फीसद किशोरियां खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। इतना ही नहीं 46 फीसद किशोरियों को माहवारी के दौरान अस्वच्छ तरीकों के इस्तेमाल के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह खुलासा एक गैर सरकारी संगठन की ओर से नन्हीं कली परियोजना के तहत देश की किशोरियों के ताजा सर्वेक्षण में हुआ है।
नंदी फांउडेशन की ओर से तैयार ‘दी टीनेज गर्ल्स’ (टीएजी) रिपोर्ट 2018 के मुताबिक, स्वास्थ्य और सुविधाओं के मापदंड पर देश की किशोरियां अभी भी काफी पीछे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां 40 फीसद लड़कियां आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं वहीं, केवल 46.3 फीसद ग्रामीण लड़कियों को माहवारी के दौरान स्वच्छ तरीके उपलब्ध हैं। जबकि देश की कुल 46 फीसद किशोरियां आज भी माहवारी के दौरान अस्वच्छ तरीके अपनाने को मजबूर हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, हर दो में से एक किशोरी खून की कमी की शिकार है और इस मामले में ग्रामीण और शहरी लड़कियों के बीच कोई खास अंतर नहीं है। वजन के मामले में भी किशोरियों का यही हाल है। हर दो में से एक किशोरी का औसत कम बीएमआइ है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा और वैवाहिक मामलों में किशोरियों के हालात काफी बेहतर हुए हैं। आज के दौर में 81 फीसद किशोरियां पढ़ाई कर रही हैं। इनमें से आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में 100 फीसद किशोरियां पढ़ाई में संलग्न हैं। ग्रामीण इलाकों में पढ़ाई कर रही किशोरियों की संख्या 78 फीसद है,

वहीं शहरी इलाकों में 87 फीसद है। विवाह की बात करें तो रिपोर्ट के मुताबिक, 96 फीसद किशोरियां अभी विवाह बंधन में नहीं बंधी हैं और ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों में यह संख्या लगभग बराबर है। 70 फीसद किशोरियों ने उच्च शिक्षा की इच्छा जताई, वहीं 74 फीसद पढ़ाई पूरा कर किसी न किसी पेशे में जाना चाहती हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में 73 फीसद किशोरियों ने 21 साल की उम्र के बाद शादी की इच्छा जताई।

नंदी फाउंडेशन के मुताबिक, यह अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा सर्वेक्षण है जिसमें देश के सभी 30 राज्यों के 600 जिलों से 74,000 किशोरियां का सर्वेक्षण किया गया। टीएजी सूचकांक पर केरल और मिजोरम सबसे आगे रहे, वहीं शहरों में मुंबई, कोलकाता और बंगलुरु किशोरियों के मामले में बेहतर प्रदर्शन करते दिखे। फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक, टीएजी रिपोर्ट देश की कुल 80 मिलियन किशोरियों के आकांक्षाओं और चुनौतियों को उजागर करती है।

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