The Supreme Court described the sabotage of private and public properties extremely critical during protests - सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ गंभीर मामला : सुप्रीम कोर्ट - Jansatta
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सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ गंभीर मामला : सुप्रीम कोर्ट

अटार्नी जनरल ने कहा कि फिल्म ‘पद्मावत’ जब प्रदर्शित होने वाली थी तो एक समूह ने खुलेआम प्रमुख अभिनेत्री की नाक काटने की धमकी दे डाली लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ। कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इस पर पीठ ने वेणुगोपाल से कहा, ‘तो फिर इस बारे में आपका क्या सुझाव है।’

Author August 11, 2018 11:11 AM
सुप्रीम कोर्ट। (express photo)

सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ के मामलों को बेहद गंभीर बताते हुए शुक्रवार को कहा कि वह कानून में संशोधन के लिए सरकार का इंतजार नहीं करेगा। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ के खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में निर्देश जारी किए जाएंगे। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस तरह की तोड़फोड़ और दंगे की घटनाओं के मामले में क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक जैसे प्राधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के किसी न किसी हिस्से में लगभग हर हफ्ते हिंसक विरोध प्रदर्शन और दंगे की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए विरोध प्रदर्शन, एससी/एसटी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश भर में हुई हिंसा और अब हाल ही में कांवड़ियों की संलिप्तता वाली हिंसक घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया।

अटार्नी जनरल ने कहा कि फिल्म ‘पद्मावत’ जब प्रदर्शित होने वाली थी तो एक समूह ने खुलेआम प्रमुख अभिनेत्री की नाक काटने की धमकी दे डाली लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ। कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इस पर पीठ ने वेणुगोपाल से कहा, ‘तो फिर इस बारे में आपका क्या सुझाव है।’ अटार्नी जनरल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ही अनधिकृत निर्माण उस वक्त रुक गए थे, जब यह फैसला लिया गया था कि इस तरह के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही होगी।

वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए कानून में संशोधन करने पर विचार कर रही है और अदालतों को उसे उपयुक्त कानून में बदलाव की अनुमति देनी चाहिए। इस पर, पीठ ने टिप्पणी की, ‘हम संशोधन का इंतजार नहीं करेंगे। यह गंभीर स्थिति है और यह बंद होनी चाहिए।’ पीठ ने इसके बाद कोडुंगल्लूर फिल्म सोसाइटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि वह इस पर विस्तृत आदेश सुनाएगी। याचिका में शीर्ष अदालत के 2009 के फैसले में दिए गए निर्देशों को लागू कराने का अनुरोध किया गया है। इस फैसले में न्यायालय ने कहा था कि विभिन्न मुद्दों पर आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने की स्थिति में इसके लिए आयोजक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। पीठ ने जवाबदेही निर्धारित करने के लिए ऐसे विरोध प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी करने का भी आदेश दिया था।

बंद के दौरान पुणे में हिंसा, 185 गिरफ्तार

मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समूहों के बुलाए बंद के दौरान पुणे शहर में तोड़फोड़ और ंिहंसा की घटनाओं के मामले में पांच महिलाओं समेत कम से कम 185 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार को बंद के दौरान शहर के चांदनी चौक इलाके में कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। एक अन्य घटना में मराठा क्रांति मोर्चा (एमकेएम) के आयोजकों द्वारा जिलाधीश नवल किशोर राम को अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपे जाने के बाद कुछ बदमाशों ने उपद्रव किया। उन्होंने जिलाधीश कार्यालय के प्रशासनिक भवन के मुख्यद्वार को नुकसान पहुंचाया, सुरक्षा केबिन के कांच और कुछ बल्ब तोड़ दिए। पुलिस के अनुसार ये बदमाश शाम तक भवन परिसर से नहीं गए, जिन्हें हल्के लाठीचार्ज के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) शिवाजी बोदखे ने बताया, चांदनी चौक पथराव मामले में 83 लोग गिरफ्तार किए गए। पांच महिलाओं समेत 81 अन्य को जिलाधीश कार्यालय में तोड़फोड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 21 अन्य को छिटपुट घटनाओं के लिये गिरफ्तार किया गया।

कांवड़िये घायल, साथियों ने की तोड़फोड़-आगजनी

उत्तर प्रदेश् के बदायूं जिले के बिनावर क्षेत्र में शुक्रवार ट्रक की टक्कर लगने से सवारी गाड़ी पर सवार अपने करीब 20 साथियों के घायल होने से नाराज कांवड़ियों ने वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की। उप-जिलाधिकारी (सदर) पारस नाथ मौर्य ने बताया कि तड़के करीब चार बजे बिनावर थाना क्षेत्र के घटपुरी गांव के पास आगे निकलने की कोशिश कर रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने बरेली से कछला जा रहे कावड़ियों से भरी एक सवारी गाड़ी में टक्कर मार दी, जिससे वह एक खड्ड में जा गिरी। उन्होंने बताया कि इस हादसे में करीब 20 कांवड़िये घायल हो गए। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। गंभीर रूप से घायल कुछ कांवड़ियों को बरेली रेफर किया गया है। इस हादसे से नाराज अन्य कावड़ियों ने टक्कर मारने वाले ट्रक में आग लगा दी और उस रास्ते से गुजर रहे करीब आधार दर्जन वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। मौर्य ने बताया कि घटना की सूचना पर पुलिस अधीक्षक (नगर) जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव और अन्य कई अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर हालात पर काबू पाया।

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