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स्थानीय निकाय चुनावों में जीतता है सत्तारूढ़ दल: कांग्रेस

उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव में निराशाजनक परिणामों को लेकर कांग्रेस ने कहा कि ये चुनाव स्थानीय मुद्दों के आधार पर लड़े जाते हैं और प्राय: इनमें उसी दल को अधिक सफलता मिलती है जिसकी संबंधित राज्य में सरकार हो।

Author नई दिल्ली | December 2, 2017 01:52 am
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव में निराशाजनक परिणामों को लेकर कांग्रेस ने कहा कि ये चुनाव स्थानीय मुद्दों के आधार पर लड़े जाते हैं और प्राय: इनमें उसी दल को अधिक सफलता मिलती है जिसकी संबंधित राज्य में सरकार हो। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भारी निराशा हाथ लगी है विशेषकर राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में पड़ने वाली सीटों पर भाजपा व अन्य दलों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस को जायस एवं गौरीगंज नगर पालिका चुनाव में हार का सामना करना पड़ा वहीं अमेठी और मुसाफिरखाना नगर पंचायतों में पार्टी ने अपने उम्मीदवार ही नहीं खड़े किए थे। इस संबंध में पूछने पर पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि अभी पूरे नतीजे नहीं आए हैं। हम इन नतीजों का निष्पक्ष ढंग से विश्लेषण करेंगे और जो भी सबक लेना होगा हम लेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कि जहां भी हारी है, वहां की जिम्मेदारी लेंगे।तिवारी ने कहा शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में कहा कि अक्सर यह देखने में आता है कि प्रदेश में जिस (दल) की सरकार हो, स्थानीय निकाय के नतीजे भी उसकी के पक्ष में आते हैं। आप इतिहास देख सकते हैं। उन्होंने इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया कि कांग्रेस जिन नोटबंदी एवं जीएसटी के मुद्दों को उठा रही है, उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें नकार दिया। तिवारी ने कहा कि जनता समझदार होती है। वह यह जानती है कि स्थानीय मुद्दे कौन से होते हैं और प्रादेशिक व राष्ट्रीय स्तर के कौन से।

तिवारी ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण देश के असंगठित क्षेत्र पर सबसे अधिक विपरीत असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों मुद्दों का गुजरात के चुनावों में असर देखने को मिलेगा क्योंकि इससे असंगठित क्षेत्र में बहुत से लोगों के रोजगार चले गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री तिवारी ने यह भी कहा कि यदि स्थानीय निकायों के चुनाव राज्य आयोग की जगह भारतीय निर्वाचन आयोग करवाए तो यह और भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2007 में पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद इस बारे में चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपकर इसकी मांग की थी।

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