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20 साल पुरानी गाड़िया बनेंगी कबाड़

नई नीति के मसविदे को जीएसटी परिषद में भी भेजा जाएगा। नीति आयोग की सिफारिश है कि कबाड़ में तब्दील किए गए वाणिज्यिक वाहनों के स्थान पर खरीदे जाने वाले नए वाहनों पर जीएसटी दर 28 फीसद की जगह 18 फीसद रखी जाए। जीएसटी परिषद इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दी जाने वाली छूट की राशि पर फैसला करेगी।

‘वाहन कबाड़ नीति’ बनाए जाने की कवायद के बारे में सड़क परिवहन व राजमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ अरसे पहले घोषणा की थी।

पुराने वाहनों को सड़क से हटाने की ‘वाहन कबाड़ नीति’ के मसविदे को एक उच्च स्तरीय बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई। शुक्रवार और शनिवार को चली बैठक में तय किया गया कि यह नीति 1 अप्रैल, 2020 से लागू होगी। इसके तहत 20 साल से ज्यादा पुराने वाणिज्यिक वाहनों को अनिवार्य तौर पर सड़कों से हटा दिया जाएगा और उन्हें तोड़कर कबाड़ बना दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद सड़क परिवहन मंत्रालय अगले तीन महीने में इस बारे में अधिसूचना जारी कर देगा। प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत, वित्त मंत्रालय, सड़क व परिवहन मंत्रालय, भारी उद्योग, पर्यावरण व इस्पात मंत्रालय के सचिव और अन्य आला अधिकारी शामिल हुए। ‘वाहन कबाड़ नीति’ के मसविदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इस बारे में औपचारिक एलान कर दिया जाएगा।

‘वाहन कबाड़ नीति’ बनाए जाने की कवायद के बारे में सड़क परिवहन व राजमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ अरसे पहले घोषणा की थी। इस नीति को लेकर नीति आयोग काम कर रहा था। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने का तर्क देते हुए इस नीति के मसविदे में वाणिज्यिक वाहनों की अधिकतम उम्र 20 साल तय कर दी गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस नीति को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई।

नई नीति के मसविदे को जीएसटी परिषद में भी भेजा जाएगा। नीति आयोग की सिफारिश है कि कबाड़ में तब्दील किए गए वाणिज्यिक वाहनों के स्थान पर खरीदे जाने वाले नए वाहनों पर जीएसटी दर 28 फीसद की जगह 18 फीसद रखी जाए। जीएसटी परिषद इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दी जाने वाली छूट की राशि पर फैसला करेगी। वित्त मंत्रालय इस नीति पर पहले ही सैद्धांतिक सहमति जता चुका है। इस्पात मंत्रालय और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी नीति का मसविदा भेजा गया है। इस्पात मंत्रालय कबाड़ केंद्र विकसित करने के बारे में और पर्यावरण मंत्रालय पर्यावरण से जुड़े नियमों के बारे में सुझाव देगा। सड़क परिवहन मंत्रालय अगले तीन महीने में इस बाबत अधिसूचना जारी करेगा।

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