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चरखे की विरासत और शुल्क की व्यवस्था

कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा के सामने बने संग्रहालय के बारे में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (एनडीएमसी) का दावा है कि यह संग्रहालय भारतीय चरखे की महान विरासत की खिड़की है जो आत्मनिर्भरता के दर्शन का साकार रूप है।

Author January 13, 2019 5:10 AM
भीड़ ज्यादा होने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया जा रहा शुल्क: उपप्रबंधक

अमलेश राजू

दिल्ली का दिल माने जाने वाले कनॉट प्लेस के आसपास बने पार्क और संग्रहालय ने भी लोगों की जेबें ढीली करनी शुरू कर दी हैं। पहले जंतर-मंतर देखने वालों से शुल्क लिया जाता था और अब इस कड़ी में नवनिर्मित राष्ट्रीय चरखा संग्रहालय भी जुड़ गया है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने कनॉट प्लेस में खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआइसी) के साथ मिलकर राष्ट्रीय चरखा संग्रहालय का उद्घाटन 21 मई 2017 को किया था। इस संग्रहालय में जाने के लिए 20 रुपए का टिकट निर्धारित कर दिया गया। संग्रहालय के उपप्रबंधक का कहना है कि भीड़ ज्यादा होने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह के प्रवेश शुल्क का प्रावधान किया गया है। संग्रहालय गांधी के चरखे को लेकर दावों के विपरीत काम कर रहा है।

कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा के सामने बने संग्रहालय के बारे में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् (एनडीएमसी) का दावा है कि यह संग्रहालय भारतीय चरखे की महान विरासत की खिड़की है जो आत्मनिर्भरता के दर्शन का साकार रूप है। परिषद् ने 26 फीट लंबा चरखा यहां संस्थापित किया है। यह 13 फीट ऊंचा और लगभग पांच टन वजन का बनाया गया है। यह चरखा विश्व का सबसे बड़ा और उच्च कोटि के स्टेनलैस स्टील से बना है। यह नौ मीटर लंबा व छह मीटर चौड़े खुले क्षेत्र में स्थापित किया गया है। एनडीएमसी का यह भी दावा है कि यह चरखा इस तरह बनाया गया है कि वह सभी मौसमों का सामना कर सके। सुबह नौ से रात नौ बजे तक खुले इस चरखा संग्रहालय को राष्टÑवाद, स्वतंत्रता आंदोलन तथा स्वदेशी कपड़ा बुनाई से जोड़कर दिखाया गया है, जहां व्यक्तिगत नागरिकों के सशक्तिकरण के चिह्न के रूप में एक सामान्य साधन से चरखा का इतिहास एवं विकास को दर्शाया गया है। यह भी दावा किया गया है कि चरखा पुन: आत्मनिर्भरता के संदेश को प्रतिध्वनित करता है और वास्तविक कौशल प्राप्त करने हेतु ‘मेन इन इंडिया’ के लिए प्रेरित करता है।

चरखा संग्रहालय देखने आने वाले रेखा छावड़ा और रोहित बिष्ट का कहना है कि अगर यह निशुल्क होता तो दर्शनार्थियों की संख्या ज्यादा होती। अगर केंद्र सरकार को स्वतंत्रता आंदोलन में चरखा के महत्त्व को बताने के लिए इस प्रकार के संग्रहालय का निर्माण करना पड़ा है तो फिर इसमें शुल्क लगाने का क्या औचित्य है? इसी प्रकार द्वारका से आए शिवम वर्मा और सुनील वर्मा ने बताया कि कनॉट प्लेस देखने आने वालों के लिए 20 रुपए बहुत ज्यादा नहीं हैं लेकिन स्कूली बच्चों के लिए यह निशुल्क होना चाहिए। बहरहाल, कनॉट प्लेस राजधानी का सबसे बड़ा वित्तीय, व्यावसायिक और व्यापार क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध हो गया है। इसी कड़ी में चरखा संग्रहालय को भी शामिल कर लिया गया है। संग्रहालय में बच्चे सहित सभी लोगों के लिए 20 रुपए का टिकट लेना पड़ता है।
बदले में खादी ग्रामोद्योग टिकटार्थियों को खादी का एक रुमाल या सूत देते हैं। संग्रहालय के उप-प्रबंधक लक्ष्मण गुप्ता का इस बाबत कहना है कि अमूमन प्रति दिन दो सौ ढाई सौ लोग यहां आते हैं। यह सातों दिन खुला रहता है और विदेशी मेहमानों के लिए भी यह दर्शनीय स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो रहा है। रावत का कहना है कि टिकट इसलिए तय किया गया है क्योंकि छोटी जगहों में भीड़ बहुत होती है। यहां विभिन्न प्रकार के लोगों का आना-जाना रहता है, लिहाजा संग्रहालय का मान -सम्मान बना रहे और किसी प्रकार का दुरूपयोग नहीं हो इसलिए नाम मात्र का टिकट तय कर दिया गया है।

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