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‘एक देश एक कर’ की अवधारणा को झुठलाते नगर निगम

आर्थिक रूप से सुदृढ़ दक्षिणी निगम ने संपत्ति कर के मामले में हस्तांतरण शुल्क म्यूटेशन फीस 150 से बढ़ाकर 1500 रुपए करने व संपत्ति के वार्षिक मूल्य का एक फीसद शिक्षा सेस लागू करने की बात कही है।

Author February 18, 2018 05:34 am
दिल्ली नगर निगम की बिल्डिंग।

केंद्र सरकार की ‘एक देश एक कर’ की अवधारणा से इतर दिल्ली के तीनों नगर निगमों ने अलग-अलग कर का प्रस्ताव लाकर लोगों को भ्रम में डाल रखा है। उत्तरी निगम ने आयुक्त के संपत्ति कर के मामले में बढ़ाए गए सभी करों को रद्द कर दिया है तो वहीं दक्षिणी निगम ने संपत्ति के वार्षिक मूल्य का एक फीसद शिक्षा सेस लागू कर दिया है। पूर्वी निगम ने भी कोई नया कर नहीं लगाकर जनता को राहत देने के उद्देश्य से संपत्ति कर में छूट व आम माफी योजना को लागू कर अपनी माली हालत सुधारने का प्रयास शुरू कर दिया है। आर्थिक रूप से परेशान उत्तरी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली निगम को अपने कर्मचारियों का वेतन देने के लिए भी पैसे की दरकार है।

सफाईकर्मियों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिलने के कारण वे आए दिन हड़ताल करते रहते हैं। निगम के ठेकेदार भी पैसे नहीं मिलने के कारण जनोपयोगी कार्यों को अधूड़ा छोड़कर आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने को मजबूर हैं। उत्तरी निगम ने मौजूदा बजट में आयुक्त की ओर से बढ़ाए गए कर प्रस्तावों को रद्द करते हुए कहा था कि वरिष्ठ नागरिकों के गृह कर में 30 फीसद की छूट दी जाएगी। ग्रामीण व शहरीकृत गांवों में मूल आबंटी-कानूनी उत्तराधिकारी की स्व-रिहायशी संपत्ति कर मुक्त होगी। दस साल का एकमुश्त कर जमा करा चुके लोगों के लिए संपत्ति के उतने हिस्से पर, जितने का कर जमा है, संपत्ति कर माफ होगा। रिहायशी संपत्ति पर स्टिल्ट फ्लोर या बेसमेंट को कार पार्किंग के लिए इस्तेमाल करने पर 75 फीसद गृह कर में छूट मिलेगी। महिलाओं और विकलांगों को संपत्ति कर में 30 फीसद की छूट व स्व-रिहायशी संपत्ति की गृह कर मुक्ति की सीमा सौ वर्ग मीटर से दो सौ मीटर की गई है।

आर्थिक रूप से सुदृढ़ दक्षिणी निगम ने संपत्ति कर के मामले में हस्तांतरण शुल्क म्यूटेशन फीस 150 से बढ़ाकर 1500 रुपए करने व संपत्ति के वार्षिक मूल्य का एक फीसद शिक्षा सेस लागू करने की बात कही है। फार्म हाउस के अंदर अगर खाली जमीन खेती के लिए इस्तेमाल की जा रही है तो उस भाग पर संपत्ति कर का 75 फीसद सर्विस चार्ज वसूल करने का फरमान जारी किया गया है। निगम का मानना है कि बीते साल एकमुश्त माफी योजना से 40 हजार करदाता संपत्ति कर के दायरे में आए थे, लेकिन अनियमित अधिकृत कॉलोनियों, अनियमित कॉलोनियों और शहरीकृत व ग्रामीण गांवों से कोई विशेष रुझान नहीं मिला था। इन सभी इलाकों के सभी श्रेणियों के करदाताओं को एक और मौका देते हुए 31 मार्च 2018 तक बिना ब्याज व जुर्माने के कर जमा कराने के लिए कहा गया है। आर्थिक रूप से कमजोर पूर्वी निगम ने भी अपने बजट में जनता को राहत देते हुए पैसे जमा करने के उद्देश्य से संपत्ति कर में छूट और आम माफी योजना को बढ़-चढ़कर लागू करने का फैसला किया है। निगम का मानना है कि टैक्स नेट में ब्याज व दंड माफी से अधिक से अधिक लोग संपत्ति कर भुगतान के लिए आगे आएंगे, जिससे लक्ष्य प्राप्ति में आसानी होगी। पूर्वी निगम सरकारी संपत्तियों, डीडीए, दिल्ली ट्रांसको, पावर ग्रिड और अन्य एजंसियों से वसूली के लिए अदालत का सहारा भी ले रहा है।

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