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दिग्गज दंगल: यहां विकास कभी मुद्दा नहीं बना

केलाबाड़ी के किसान रामसुख महतो ने बताया कि इस ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। सरकारी मदद मिले तो यह धंधा और पनप सकता है। दरअसल यहां अबतक हुए चुनावों में विकास कभी मुद्दा नहीं बना।

तारिक अनवर और दुलालचंद्र गोस्वामी

बंगाल और बिहार की सीमा पर बसा कटिहार संसदीय क्षेत्र सीमांचल का अंग है। यह इलाका अतिपिछड़ा माना जाता है। कटिहार इलाके का मुआयना करने पर लगा कि यहां मखाना की खेती की काफी बड़ी संभावना है। छोटे-छोटे तलाब लोगों ने अपने खेतों में इसको उगाने के लिए बना रखे है। केलाबाड़ी के किसान रामसुख महतो ने बताया कि इस ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। सरकारी मदद मिले तो यह धंधा और पनप सकता है। दरअसल यहां अबतक हुए चुनावों में विकास कभी मुद्दा नहीं बना। होटल व्यापारी आनंद शर्मा कहते हैं कटिहार सीट पर चुनाव का मुख्य मुद्दा कौमी बनकर रह जाता है। इसकी वजह वे बताते हैं कि यहां 39 फीसद मुसलिम, 35 फीसद पिछड़ा-अतिपिछड़ा मतदाता हैं। पांच दफा यहां से तारिक अनवर जीते हैं। 1980, 1984, 1996, 1998 में कांग्रेस टिकट पर और 2014 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के घड़ी छाप पर। 1967 में यहां से कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सीताराम केसरी चुनाव लड़ जीते थे। 1999 से 2009 तक हुए तीन चुनाव में यह सीट भाजपा के कब्जे में रही। इस दल के निखिल चौधरी तीन दफा जीत सांसद बने। मसलन बीते 32 साल तक यह सीट तारिक अनवर और निखिल चौधरी के इर्द गिर्द ही रही।

अबकी यह सीट भाजपा-जदयू सीट बंटवारे में जदयू के खाते में गई है। जदयू ने दुलाल चंद्र गोस्वामी को तीर देकर चुनाव मैदान में उतारा है।
तारिक अनवर कद्दावर नेता हैं। 1999 में इन्होंने सोनिया गांधी को विदेशी मूल का बता विरोध कर कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया था और राष्ट्रवादी कांग्रेस की सदस्यता ली। अबकी 2018 में राफेल पर एनसीपी नेता शरद पवार के राजग सरकार के समर्थन में आए बयान से भड़ककर उन्होंने एनसीपी छोड़ी। और फिर कांग्रेस का पंजा थाम लिया।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इनके समर्थन में सभा करने अमेठी में अपना पर्चा दाखिल करने के बाद बुधवार 10 अप्रैल को कटिहार आए। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरा है। प्रमोद तांती ने बताया कि थोड़ी बहुत तारिक अनवर को लेकर नाराजगी थी, वह भी कम हुई है। यह संसदीय इलाका छह विधानसभा क्षेत्र वाला है। कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी। इनमें से दो विधानसभा सीट पर भाजपा , दो पर कांग्रेस, एक राजद और एक पर सीपीआइ (एमएल) का कब्जा है। यहां के 16 लाख 45 हजार 713 मतदाता 18 अप्रैल यानी दूसरे चरण में वोट डालेंगे। यहां आठ उम्मीदवार चुनाव मैदान में है।

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