The government's fees act is applicable in private schools in Rajasthan but it has no value - राजस्थान: फीस एक्ट ठेंगे पर, मनमानी जारी - Jansatta
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राजस्थान: फीस एक्ट ठेंगे पर, मनमानी जारी

सरकार ने एक खंडीय फीस विनियामक कमेटी और पुनरीक्षण समिति बना रखी है। इन दोनों अपीलीय समितियों में सरकारी अफसरों को रखा गया है। इससे ही अभिभावकों को संरक्षण नहीं मिल पाता है। निजी स्कूल संचालक इन समितियों से साठगांठ कर मनमाने तरीके से फीस वसूलते हैं।

Author April 25, 2018 4:21 AM
राजस्थान में फीस एक्ट के मुताबिक हर स्कूल में फीस निर्धारण समिति बनेगी। प्रतीकात्मक तस्वीर।

राजस्थान में नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों की बढ़ी फीस का नजला अभिभावकों पर गिरना शुरू हो गया है। निजी स्कूलों में सरकार का फीस एक्ट लागू है, पर उसे कोई मान नहीं रहा है। स्कूलों में बेतहाशा फीस वृद्धि से गुस्साए अभिभावक धरना प्रदर्शन तक कर रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि अधिकतर स्कूल फीस एक्ट का पालन नहीं कर रहे हैं। सरकार निजी स्कूलों पर नकेल कसने में नाकाम रही है। प्रदेश में निजी स्कूलों में फीस पर नियंत्रण के लिए फीस एक्ट लागू किया गया है। इसके लिए स्कूल स्तर पर फीस निर्धारण समिति भी बनाई जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 24 हजार से ज्यादा स्कूलों में ऐसी समितियां बन गई हैं पर ये सब कागजों पर हैं। इस वर्ष जैसे ही एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हुआ तो निजी स्कूलों के प्रबंधन ने बच्चों को नई फीस के आदेश थमा दिए। इससे अभिभावकों में अफरा-तफरी मच गई। सबसे ज्यादा फीस बढ़ोतरी राजधानी जयपुर के नामचीन निजी स्कूलों में की गई।

इस पर सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रदेश के 33091 निजी स्कूलों में से 7394 ऐसे हैं जिनमें अभी तक फीस एक्ट के नियमों के तहत स्कूल स्तरीय फीस निर्धारण कमेटियां नहीं बनी हैं। फीस बढ़ोतरी के खिलाफ हो रहे आंदोलन के बाद अब शिक्षा निदेशालय ने कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी कर दिया है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने जयपुर के एक बड़े स्कूल में जांच में पाया कि उसने नियमों की अनदेखी करते हुए 48 फीसद से अधिक फीस बढ़ा दी। इस पर शिक्षा विभाग ने अब रोक लगा दी है।

क्या कहता है फीस एक्ट

– राजस्थान में फीस एक्ट के मुताबिक हर स्कूल में फीस निर्धारण समिति बनेगी।
– इसमें 5 स्कूल के और 5 ही अभिभावक होंगे। समिति में अध्यक्ष और सचिव दोनों ही स्कूल से होंगे।
– अभिभावकों का चयन विद्यालय प्रशासन लाटरी से करेगा। फीस निर्धारण की बैठक में 5 सदस्य होने जरूरी हैं।

कहां हैं खामियां

सरकार ने एक खंडीय फीस विनियामक कमेटी और पुनरीक्षण समिति बना रखी है। इन दोनों अपीलीय समितियों में सरकारी अफसरों को रखा गया है। इससे ही अभिभावकों को संरक्षण नहीं मिल पाता है। निजी स्कूल संचालक इन समितियों से साठगांठ कर मनमाने तरीके से फीस वसूलते हैं। बच्चों की कापी-किताबें और पोशाक खरीदने को मजबूर करते हैं। इस एक्ट में एक लोचा यह भी है कि फीस निर्धारण समिति के फैसले से असंतुष्ट हैं तो अपील समिति में जाया जा सकता है पर अभिभावक नहीं जा सकते हैं। अभिभावकों के स्कूल के खिलाफ अपील नहीं करने के प्रावधान के कारण भी निजी विद्यालय मनमानी करते हैं। इस प्रावधान को हटाने के लिए सरकार अभिभावकों की कोई सुनवाई नहीं करती है।

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