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दिल्ली मेरी दिल्ली: मुकरने में माहिर

अधिकारी मुख्यमंत्री से माफी मंगवाने पर अड़े हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री केजरीवाल ने पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर लगाए आरोपों के लिए माफी मांग कर पार्टी और राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया। यह समझ से परे है कि अगर उनके पास सबूत नहीं थे तो आरोप क्यों लगाए और आरोप लगाए तो अब माफी क्यों मांग रहे हैं।

Author Published on: March 19, 2018 5:01 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (एक्सप्रेस फोटोः अमित मेहरा)

दिल्ली में जब से आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनी है, तब से मीडिया को खबर के लिए कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। एक मुद्दा खत्म होता है तो दूसरा सामने आ जाता है। दिल्ली के मुख्य सचिव की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर उनके सामने हुई पिटाई के मुद्दे को लेकर नौकरशाहों और सरकार के बीच मचा विवाद अभी भी सुलझा नहीं है। अधिकारी मुख्यमंत्री से माफी मंगवाने पर अड़े हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री केजरीवाल ने पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर लगाए आरोपों के लिए माफी मांग कर पार्टी और राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया। यह समझ से परे है कि अगर उनके पास सबूत नहीं थे तो आरोप क्यों लगाए और आरोप लगाए तो अब माफी क्यों मांग रहे हैं। नेताओं पर झूठ बोलने और अपनी बात से मुकरने के आरोप तो लगते ही रहे हैं लेकिन घोषित तौर पर बार-बार खुद को झूठा बताकर केजरीवाल पता नहीं कौन सी राजनीति कर रहे हैं? हालांकि इस पर आप के ही एक वरिष्ठ नेता ने चुटकी जरूर ले ली है कि वे थूक कर चाटने में माहिर हैं।

इंतजाम का बखान
कांग्रेस के दिल्ली में हुए महाधिवेशन में देश भर से हजारों कार्यकर्ता जुटे। इन सबका आना तय था लिहाजा, अधिवेशन की स्वागत समिति ने सबके खाने-पीने का व्यापक इंतजाम अधिवेशन स्थल पर किया। नाश्ते और भोजन के लिए अलग से बड़ा पंडाल लगाकर बड़ी संख्या में हलवाइयों को वहां तैनात किया गया था ताकि किसी को कोई दिक्कत न होने पाए। दक्षिण भारतीय लोगों को ध्यान में रखकर दक्षिण भारतीय व्यंजनों की पूरी रेंज ही पेश कर दी गई, तो उत्तर भारतीयों के लिए भी स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध था। लेकिन हालत यह थी कि लोग खाए भी जा रहे थे और बुराड़ी अधिवेशन के गीत भी गाए जा रहे थे। पंडाल में कई ऐसे लोग दिखे जो कह रहे थे कि इंतजाम तो इस बार भी जोरदार है, लेकिन जब वे 2010 में बुराड़ी अधिवेशन में आए थे, तब की बात ही कुछ और थी। जो मन हो वो खाओ और जितना मन करे उतना खाओ। किसी ने कहा कि वहां तो एक दिन उन्होंने केवल मिठाई खाकर ही पेट भर लिया था। कुछ कार्यकर्ताओं ने जयपुर अधिवेशन की भी चर्चा की और कहा कि वहां भी खाने-पीने का इंतजाम जोरदार था। हालांकि जब दिल्ली के आयोजक घूम-घूम कर पूछने लगे कि किसी को खाने-पीने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई तो इन आलोचकों का भी यही जवाब था कि उन्हें खूब मजा आया है।

हंसी का पात्र
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को धरना देने और खुद को बेचारा दिखाने में महारत हासिल है। मुख्यमंत्री रहते हुए ही उन्होंने रेल भवन पर धरना दिया और एक थानेदार को हटाने के बाद धरना खत्म किया। दिल्ली में जारी सीलिंग रुकवाने के लिए एक बार फिर उन्होंने 31 मार्च से आंदोलन करने का एलान किया है। यह अजीब बात है, जिसको फैसला लेना है वही पीड़ित बन कर आंदोलन करने लगता है। सीलिंग रोकने के लिए दिल्ली सरकार को जो काम करने चाहिए वह तो किए नहीं, उल्टा आंदोलन की घोषणा कर दी। दिल्ली में साल-दर-साल अनधिकृत निर्माण हुए, वह भी राजनीतिक दलों के संरक्षण में। सीलिंग के हालात भी उसी की वजह से बने। भले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रिहायशी इलाकों में बने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग हो रही है, लेकिन यह रुकेगी तभी, जब राजनीतिक दल इसे रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास करेंगे। अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर थोपना और खुद को असहाय दिखाकर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ना तो खुद का मजाक बनाने जैसा है।

माफीनामे पर घमासान
केजरीवाल के माफीनामे ने जहां आम आदमी पार्टी में घमासान मचा दिया है, वहीं दूसरी ओर लोगों को अटकलें लगाने पर भी मजबूर कर दिया है कि आखिर इस माफी का राजनीतिक मकसद क्या है। इसके जरिए कई लोगों को तंज कसने और चुटकुले बनाने का भी मौका मिल गया, खासकर सोशल मीडिया पर। केजरीवाल की राजनीति की नींव देश के तंत्र को भ्रष्ट बताने और उसमें तमाम मौजूदा राजनीतिक पार्टियों को शामिल साबित करने की रही है। ‘सब मिले हुए हैं जी’ के जुमले की राजनीति करने वाले केजरीवाल ने पंजाब के पूर्व मंत्री मजीठिया से माफी मांग कर लोगों के मन में सवाल पैदा कर दिया कि ‘कहीं आप भी तो वही नहीं हैं जी’। वैसे लोग यह भी पूछ रहे हैं कि ‘फेहरिस्त काफी लंबी है किस-किस से माफी मांगोगे साहब’।
-बेदिल

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