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सेवा के दो रोजा राष्ट्रीय सम्मेलन में असंगठित कामगारों के बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की मांग उठी

असंगठित कामगार महिलाओ की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों को उदारता से आगे आना चाहिए।

सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व मेयर प्रीति शेखर , दिल्ली से आए सोपान जोशी और सेवा से जुड़ी महिलाओं ने साझा तौर पर दीप प्रजल्वित कर किया।

असंगठित कामगार महिलाओ की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों को उदारता से आगे आना चाहिए। तभी देश की गरीबी भी दूर होगी और विकास भी तेजी से होगा। यह बात भागलपुर में मंगलवार को शुरू हुए दो रोजा सेवा के राष्ट्रीय सम्मेलन में खुलकर सामने आई। सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व मेयर प्रीति शेखर , दिल्ली से आए सोपान जोशी और सेवा से जुड़ी महिलाओं ने साझा तौर पर दीप प्रजल्वित कर किया।

सोपान जोशी का कहना था कि जल-थल-मल को सामाजिक नजरिए से देखने की जरूरत है। गंगा – यमुना नदियों का जल प्रदूषित हो चुका है। आर्सेनिक से लोग परेशान है। चर्म और कैंसर रोग खासकर महिलाओं में तेजी से पनपा है। बिहार के साथ बंगाल व दूसरे राज्य भी प्रभावित है। पुराने जमाने की परंपरा कुएं , तालाब लुप्त हो गई है। पीने के पानी का बाजारीकरण हो गया है। यह देश हित में नहीं है। उन्होंने बारिश के पानी को संचित करने पर जोर दिया।

बाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सेवा की राष्ट्रीय सचिव मनाली साह ने कहा कि सेवा देश के 18 राज्यों में काम कर रहा है। यह 14 लाख असंगठित कामगार महिलाओं का राष्ट्रीय संगठन है। देश में 95.7 फीसदी कामगार है। जिनका 62 फीसदी जीडीपी , 39 फीसदी निर्यात और 50 फीसदी बचत में योगदान है। मगर यह दिखाई नहीं पड़ता। इन्हें सामाजिक सुरक्षा, आमदनी , भोजन, काम की गारंटी होनी चाहिए।प्राकृतिक संपदा पर इनका हक होना चाहिए। बीड़ी मजदूरों को सरकार की घोषित योजना का लाभ मिलना चाहिए। कूड़ा बीनने वाली महिलाओं को वहां का नगर निगम कार्ड निर्गत करे। विधवा पेंशन और बीपीएल कार्ड ज़रूरतमंदों को मिले।

इनका कहना था कि असंगठित कामगारों की भलाई के लिए बिहार सरकार ने श्रमजीवनी बोर्ड बनाया है। मगर अबतक यह कारगर साबित नहीं हो रहा है। इस पर गौर करने की जरूरत है। पत्रकार सम्मेलन में केरल की महासचिव सोनिया जार्ज , बिहार की माधुरी और दिल्ली से आई नीलम गुप्ता मौजूद थी।

दो रोजा सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों जम्मू, केरल, असम, महाराष्ट्र, गुजरात दिल्ली से आई करीब तीन सौ महिला प्रतिनिधि शिरकत कर रही है। सम्मेलन हाल में सेवा की महिलाओं की बनाई बैग, थैले जैसे रोजमर्रा के उपयोग के सामान की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।

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