ताज़ा खबर
 

बलात्कार के आरोपी डॉक्टर को अदालत ने दी जमानत, जज ने कहा- दोनों डॉक्टर बालिग और पढ़े-लिखे हैं

अदालत ने यह कहते हुए आरोपी को जमानत दी कि दोनों बालिग हैं और पढ़े लिखे हैं और उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अपने संबंधों के परिणाम को समझते होंगे।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली की एक अदालत ने शादी का झूठा वादा करके एक महिला डॉक्टर से बलात्कार करने के आरोपी डॉक्टर को जमानत दे दी है। अदालत ने यह कहते हुए आरोपी को जमानत दी कि दोनों बालिग हैं और पढ़े लिखे हैं और उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अपने संबंधों के परिणाम को समझते होंगे। विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और उतनी ही रकम की जमानत राशि पर आरोपी को जमानत दी है। अदालत ने जमानत देते वक्त इस तथ्य पर गौर किया कि दोनों के बीच का संबंध समान धरातल पर था और आरोपी ‘ लाभ लेने की स्थिति’ में नहीं था।अदालत ने दोनों के बीच एसएमएस के आदान- प्रदान पर भी गौर किया और कहा कि यह संकेत देता है कि महिला संबंध में इच्छुक और सक्रिय भागीदार थी। अदालत ने हालांकि आरोपी को निर्देश दिया कि वह कथित पीड़िता से संपर्क नहीं करेगा, न ही उसे डराएगा, धमकाएगा और न ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेगा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार कथित पीड़िता और आरोपी डॉक्टर हैं और वे फरवरी 2017 में एक-दूसरे से आॅनलाइन मिले थे। कुछ महीने बाद आरोपी ने उससे शादी करने की पेशकश की और उसके बाद दोनों वसंत कुंज में एक साथ रहने लगे। आरोपी वसंत कुंज में ही एक निजी अस्पताल में काम करता था। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने इस दौरान उससे बदसलूकी शुरू कर दी और उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। वसंत कुंज थाने में इस साल 24 मार्च को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

बिना जिरह के हुई सजा को अदालत ने किया रद्द

दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति की कार से लैपटॉप, के्रडिट कार्ड और अन्य बहुमूल्य सामान चुराने के दोषी की तीन साल की सजा निरस्त कर दी। अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता से जिरह के बिना उसे सजा सुनाकर गलती की। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसके गुप्ता ने मामला वापस मजिस्ट्रेट अदालत को भेजकर निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को जिरह के लिए बुलाया जाए और मामले में नए सिरे से फैसला किया जाए। सत्र न्यायाधीश ने कहा कि किसी गवाह से जिरह सच सामने लाने में महत्वपूर्ण होती है। अपील करने वाले के पास जिरह के दौरान गवाह की विश्वसनीयता की जांच करने के अलावा अपने बचाव को रिकार्ड में लाने के लिए कुछ नहीं था। जिरह हुई ही नहीं।

सत्र अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता से जिरह होनी चाहिए थी क्योंकि वह 2012 में दक्षिण पूर्व दिल्ली के गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास हुई घटना का एकमात्र चश्मदीद गवाह था। शिकायत के अनुसार, वरुण दत्त 25 सितंबर 2012 को अपनी सेंट्रो कार चला रहे थे जब आरोपी ने उनकी खिड़की खट खटाकर उनसे कहा कि उनकी कार से तेल निकल रहा है। वरुण कार से निकले और उन्होंने पाया कि तेल नहीं निकल रहा था। जब वह वापस लौटे तो उन्होंने पाया कि उनका लैपटॉप बैग, के्रडिट कार्ड, एटीएम कार्ड और अन्य बहुमूल्य सामान गायब था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App