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टिकट बंटवारे में देरी और गठबंधन की कवायद कांग्रेस को ले डूबी

दिल्ली की सभी सात सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों की पराजय के कारणों की पड़ताल के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित की ओर से दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री डॉ अशोक कुमार वालिया की अगुआई में गठित की गई पांच सदस्यीय समिति ने दीक्षित को सौंपी अपनी रिपोर्ट में हार की वजहों का विस्तार से विवरण दिया है।

Author नई दिल्ली | Published on: June 24, 2019 5:41 AM
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

लोकसभा के हाल ही में खत्म चुनाव में कांग्रेस दिल्ली में और बेहतर प्रदर्शन करती, अगर उसने समय रहते अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया होता। आम आदमी पार्टी (आप) से चुनावी गठबंधन को लेकर लंबे समय तक चले कयासों के दौर और दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र में बाहरी उम्मीदवार उतारे जाने से भी मतदाताओं में गलत संदेश गया। पार्टी का पस्त पड़ा लुंज-पुंज संगठन भी इसकी करारी हार की सबसे अहम वजह साबित हुआ। दिल्ली की सभी सात सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों की पराजय के कारणों की पड़ताल के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित की ओर से दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री डॉ अशोक कुमार वालिया की अगुआई में गठित की गई पांच सदस्यीय समिति ने दीक्षित को सौंपी अपनी रिपोर्ट में हार की वजहों का विस्तार से विवरण दिया है।

इस समिति में डॉ वालिया के अलावा, डॉ योगानंद शास्त्री, परवेज हाशमी, जयकिशन और पवन खेड़ा को भी शामिल किया गया था। इस समिति की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने अपने उम्मीदवार तय करने में देरी की। इसका परिणाम यह हुआ कि इन उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार करने और जनता से संपर्क करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। यदि उन्हें थोड़ा और समय मिला होता तो वे निश्चित रूप से ज्यादा बेहतर परिणाम दे सकते थे। सूत्रों ने बताया कि इस पांच सदस्यीय समिति ने भी माना है कि ‘आप’ से चुनावी गठबंधन को लेकर लंबे समय तक चली कयासबाजी का भी मतदाताओं पर बहुत गलत असर पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सूबे के लोग ‘आप’ सरकार से सख्त नाराज हैं। ऐसे में उस पार्टी से कांग्रेस के चुनावी गठजोड़ की कवायद ने पार्टी के मतदाताओं में नाराजगी बढ़ाई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण दिल्ली में कांग्रेस की करारी हार की बड़ी वजह बाहरी उम्म्ीदवार उतारा जाना था। मुक्केबाज बिजेदर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने भले ही उनके ग्लैमर का फायदा उठाने की सोची हो लेकिन इस मामले में दांव उल्टा पड़ गया। बिजेंद्र सिंह स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं से बेहतर तालमेल नहीं बना सके जिसका भारी नुकसान हुआ।

सूत्रों के अनुसार समिति ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली में पार्टी के संगठन की कमजोरी को कांग्रेस उम्मीदवारों की हार की सबसे बड़ी वजह करार दिया है। इसमें कहा गया है कि जिन बूथ स्तर की समितियों के गठन की बात कही गई, वह असल में पूरा फर्जीवाड़ा था। हर बूथ से कुछ नाम दे दिए गए लेकिन चुनाव के दौरान जमीनी स्तर पर ऐसी कोई समिति काम करती नजर नहीं आई। वालिया समिति ने सिफारिश की है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सूबे के कांग्रेसी संगठन में भारी फेरबदल किया जाना जरूरी है। सूत्रों ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीक्षित ने वालिया समिति की रिपोर्ट के मद्देनजर जल्दी ही तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के साथ बैठक कर पार्टी संगठन में भारी फेरबदल करने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि बहुत जल्दी इस बारे में निर्णय किया जा सकता है।

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