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मध्यवर्ग बेहाल…

मानक कटौती में स्वास्थ्य और परिवहन खर्च की छूट को समाहित कर दिया। दूसरी ओर, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए उपकर (सेस) तीन से बढ़ाकर चार फीसद कर दिया।

Author February 2, 2018 4:22 AM
केन्द्रीय वित्त मंत्र अरुण जेटली।

करों में राहत की उम्मीद लगाए वेतनभोगियों और मध्य वर्ग को बजट से निराशा हाथ लगी। एक तरफ से आय में मानक कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन) की घोषणा कर राहत देने का दावा किया, दूसरी ओर दो प्रावधानों के जरिए इससे मिलने वाले लाभ को छीन लिया। मानक कटौती में स्वास्थ्य और परिवहन खर्च की छूट को समाहित कर दिया। दूसरी ओर, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए उपकर (सेस) तीन से बढ़ाकर चार फीसद कर दिया। दोनों प्रावधानों के कारण जो राहत मिलेगी, वह सालाना 177 रुपए से ज्यादा की नहीं होगी। वह भी पांच लाख तक की आय वालों को। इसके अलावा इक्विटी बाजार में निवेशकों को झटका मिला है। एक लाख रुपए से ज्यादा दीर्घावधि पूंजीगत लाभ पर 10 फीसद कर का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार ने 12 साल बाद मानक कटौती के प्रावधान की वापसी की है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे करदाताओं के लिए राहत बताकर पेश किया और कहा कि इससे सरकारी खजाने पर आठ हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। लेकिन बजट भाषण के बाद एक और आंकड़ा सामने आया, जिससे राहत की पोल खुल गई। उपकर में एक फीसद की बढ़ोतरी से सरकार 11 हजार करोड़ रुपए की वसूली कर लेगी वेतनभोगियों से। साफ है कि आयकर दाताओं पर सीधे तौर पर तीन हजार करोड़ रुपए का बोझ डाल दिया गया है।

मानक कटौती का आशय यह है कि आपकी कुल कर योग्य आमदनी में से 40 हजार रुपए घटाकर आयकर का आकलन किया जाएगा। लेकिन इसके एवज में यातायात भत्ता और चिकित्सा खर्च के भत्तों पर कर छूट खत्म कर दी गई। अभी तक हर वित्त वर्ष में 15 हजार रुपए तक का मेडिकल बिल टैक्स फ्री होता रहा है। ट्रांसपोर्ट भत्ते के तौर पर 19200 रुपए की छूट मिलती रही है। इस तरह से इन दोनों भत्तों के छिन जाने से टैक्स छूट वाली आय की सीमा सिर्फ 5800 रुपए बढ़ेगी। यानी अब ढाई लाख की बजाय दो लाख 55 हजार 800 रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री होगी। यह बचत टैक्स स्लैब पर निर्भर करेगी। पांच फीसद कर दायरे वाले मानक कटौती के बाद टैक्स में सिर्फ 290 रुपए की छूट पाते।

वहीं 20 फीसद तक टैक्स का भुगतान करने वालों को 1160 और 30 फीसद तक वालों को 1740 रुपये की बचत होती। लेकिन इस राहत को सेस बढ़ाकर बेमजा कर दिया गया। जितना आयकर बनेगा, उस पर एक फीसद उपकर लगेगा। ऐसे में पांच लाख तक की सालाना आय वालों को छोड़ दें तो ज्यादातर मामलों में यह फायदा भी नहीं मिलने वाला है। ज्यादा आय वालों की टैक्स देनदारी बढ़ती जाएगी। सरकार के बजट एलान से आयकरदाताओं का एक रोचक आंकड़ा सामने आया है। औसत रूप से हरेक वेतनभोगी ने 76, 306 रुपए आयकर अदा किए, जबकि व्यवसायियों ने औसतन मात्र 25,753 रुपए ही कर जमा किए। साफ है कि वेतनभोगियों पर आयकर की मार ज्यादा पड़ी है।

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