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सेना को मिला हथियार का पता लगाने वाला रडार, मनोहर पर्रिकर ने दी DRDO को बधाई

सैन्य हथियार विकसित करने वाले सरकारी संगठन डीआरडीओ ने आज हथियार पता लगाने वाला स्वदेश में विकसित रडार सेना को सौंप दिया।

Author नई दिल्ली | March 2, 2017 11:14 PM
डीआरडीओ को बधाई देते हुए पर्रिकर ने कहा कि सेना की जरूरत पूरी होने के बाद सरकार डब्ल्यूएलआर के आयात को मंजूरी देने पर विचार कर सकती है।

सैन्य हथियार विकसित करने वाले सरकारी संगठन डीआरडीओ ने आज हथियार पता लगाने वाला स्वदेश में विकसित रडार सेना को सौंप दिया। इसकी तैनाती संभवत: जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर की जाएगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल ऐंड कैमिकल (एनबीसी) रेकी व्हेकिल और एनबीसी ड्रग सेना को सौंपी। सूत्रों ने बताया कि प्रायोगिक तौर पर नियंत्रण रेखा पर हथियारों का पता लगाने वाले चार रडार (डब्ल्यूआरएल) तैनात किए गए हैं और यह फायदेमंद साबित हुए हैं क्योंकि इनकी तैनाती के बाद से पाकिस्तान की ओर से तोपों से होने वाली गोलेबारी में कमी आई है।

डीआरडीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डब्ल्यूएलआर स्वाथी 50 किमी की रेंज में मोर्टार, गोले और रॉकेट हथियारों की सटीक स्थिति बता सकता है। रडार सौंपे जाने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और सैन्य प्रमुख जनरल बिपिन रावत के अलावा डीआरडीओ के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हुए। इसमें, एनबीसी रेकी व्हेकिल और एनबीसी ड्रग्स सेना को सौंपे गए।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह रडार विभिन्न स्थानों पर विभिन्न हथियारों से होने वाले हमलों से निबटने में सक्षम है। डीआरडीओ को बधाई देते हुए पर्रिकर ने कहा कि सेना की जरूरत पूरी होने के बाद सरकार डब्ल्यूएलआर के आयात को मंजूरी देने पर विचार कर सकती है। सेना ने 30 डब्ल्यूएलआर की जरूरत बताई है। सैन्य प्रमुख ने कहा, ‘‘नियंत्रण रेखा पर डब्ल्यूएलआर का भरपूर दोहन हो रहा है।’कार्यक्रम में डीआरडीओ प्रमुख एस क्रिस्टोफर ने कहा, ‘‘नौसेना और वायुसेना के बाद अब हमारे उत्पाद सेना को सौंपने का समय आ गया है। यह डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के लिए गर्व का क्षण है।’’

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