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राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान, 4 केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा और सीकर सीट पर तिकोने संघर्ष की उम्मीद भी है।

Author April 11, 2019 3:12 AM
राज्य की सभी सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं।

राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों पर अब चुनाव की रंगत जम गई है। प्रदेश में पहले चरण में 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र दाखिल होने का काम पूरा हो गया है और दूसरे चरण के लिए 6 मई को होने वाले मतदान के परचे भरना शुरू हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले वाले इस चुनाव में चार केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। राज्य में सत्ता बदलने के बाद अब इन मंत्रियों को अपने पांच साल के पिछले कामकाज का ब्योरा देने में भी जोर आ रहा है। मंत्रियों को अब सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ही आसरा है। राज्य की सभी सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। भाजपा 25 में से 24 सीटों पर चुनाव लडेगी और एक सीट नागौर उसने सहयोगी दल रालोपा के लिए छोड़ी है। इस सीट पर रालोपा के संयोजक विधायक हनुमान बेनीवाल कांग्रेस की ज्योति मिर्धा का मुकाबला करेंगे।

ज्यादातर सीटों पर सीधा मुकाबला: प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा और सीकर सीट पर तिकोने संघर्ष की उम्मीद भी है। बांसवाड़ा में भाजपा के कनकमल कटारा और कांग्रेस के ताराचंद भगोरा के अलावा भारतीय ट्राइबल पार्टी के कन्हैया लाल रोत भी मैदान में है। बीटीपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था। इससे आदिवासी इलाकों में भाजपा और कांग्रेस का वोट खिसक गया था। इसके साथ ही सीकर सीट पर माकपा के अमराराम के मैदान में होने से कांग्रेस और भाजपा को परेशानी महसूस हो सकती है। इस सीट पर कांग्रेस ने भाजपा छोड़ कर आए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया को मैदान में उतारा है तो भाजपा ने पुराने सांसद सुमेधानंद को फिर मौका दिया है। माकपा के अमराराम की छवि इलाके के किसानों में एक जुझारू नेता की है। अमराराम का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही किसानों और मजदूरों को छला है। सीकर क्षेत्र के किसानों ने अब बदलाव का फैसला कर लिया है। उनका कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के उम्मीदवार पूंजीपति वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे है। इसलिए इस बार सीकर की जनता दोनों को सबक सिखाएगी।

पहला चरण : 29 अप्रैल को जिन 13 संसदीय सीटों पर मतदान होगा वे है, टोंक-सवाई माधोपुर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाडमेर, जालोर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा और बारां-झालावाड़।

दूसरा चरण : प्रदेश की 12 सीटों पर 6 मई को मतदान होगा वे है सीकर,चूरू, झुंझनू, श्रीगंगानगर, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, दौसा, भरतपुर, धौलपुर-करौली, अलवर और नागौर संसदीय सीटें शामिल हैं।

भाजपा की तरफ से चार केंद्रीय मंत्री अपनी पुरानी सीटों पर फिर से मैदान में है। इनमें जयपुर ग्रामीण से राज्यवर्धन सिंह राठौड़, जोधपुर से गजेंद्र सिंह शेखावत, पाली से पीपी चौधरी और बीकानेर से अर्जुन मेघवाल किस्मत आजमाएंगे। बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल और पाली में केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी को पार्टी के ही नाराज लोगों का सामना करना पड़ रहा है। इन मंत्रियों में सबसे कड़ा मुकाबला जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को करना पड़ रहा है। उनका मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार वैभव गहलोत से है जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे हैं। चूंकि शेखावत आरएसएस से जुडे हैं, इसलिए उनके प्रचार की कमान अब संघ ने संभाल ली है।

मेरा चुनाव तो विकास के मुद्दे पर हो रहा है। भाजपा के मुद्दे तो जोधपुर में गौण हो गए हैं। -वैभव गहलोत, कांग्रेस उम्मीदवार

चुनाव में मुकाबला कड़ा जरूर है पर प्रधानमंत्री मोदी के पांच साल के कामकाज से आम आदमी खुश है। राष्ट्रवाद को लेकर भाजपा की जो नीति है उससे युवा वर्ग उनसे जुड़ा हुआ है। -गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय मंत्री

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