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Deaths on Mount Everest: एवरेस्ट फतह किया, पर पत्नी को खो दिया, बताया- मेरे सामने उसने तड़प-तड़पकर तोड़ा दम, लाश से खींचकर मुझे दूर ले गया था शेरपा

Deaths on Mount Everest: ठाणे में जन्में दंपति माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए निकले थे। लेकिन इस दौरान पत्नी ने ऑक्सीजन की कमी के चलते तड़पकर पति के सामने दम तोड़ दिया।

June 4, 2019 3:27 PM
अंजलि कुलकर्णी और शरद कुलकर्णी फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

माउंट एवरेस्ट फतह करने के इरादे से निकले पर्वतारोही शरद कुलकर्णी की पत्नी अंजलि कुलकर्णी उन तीन भारतीयों में से एक थीं, जिनकी मौत माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान हुई थी। शरद कुलकर्णी ने बताया कि कैसे एवरेस्ट के दक्षिण शिखर सम्मेलन में पर्वतारोहियों की अधिक भीड़ होने के कारण और ऑक्सीजन की कमी के चलते उसकी पत्नी की सांसे थम गई। आखिरकार, जब पत्नी की सांसें बंद हो गई तो शेरपा (गाइड) मुझे लाश से खींचकर दूर ले गया था।

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दरअसल, शरद कुलकर्णी और उनकी पत्नी अंजलि कुलकर्णी पिछले पांच वर्षों से एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन इस हादसे के बाद शरद रुंधे गले से कहते हैं कि 23 मई को ट्रेक पर लोगों की भारी कतार के कारण मैं और मेरी पत्नी फंस गए थे। जब तक मैं बेस कैंप तक पहुंचा तब तक मेरे मस्तिष्क में सूजन आ गई, जिससे मेरी आंखों की रोशनी भी प्रभावित हुई थी। उन्होंने बताया कि मैंने अपनी पत्नी को ऑक्सीजन के लिए जूझते देखा। ऑक्सीजन की आपूर्ति खत्म हो गई, यहां तक ​​कि बचाव दल भी ट्रैफिक में फंस गए। शरद शिखर पर पहुंचने में कामयाब रहे लेकिन पत्नी अंजलि नहीं पहुंच सकी क्योंकि वह महज 50 मीटर दूर पहले ही गिर गई थी। इस दौरान ओडिशा की कल्पना दास (49) और पुणे के निहाल बागवान (27) की भी मौत हो गई थी।

महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मे इस दंपति में ट्रेकिंग के लिए साझा जुनून था। शरद के बेटे शांतनु ने बताया कि हमारा परिवार हमेशा खेलों में रूचि रखता था। हम अपनी छुट्टियों में महाराष्ट्र से लेकर हिमालय तक घूमने जाते थे। शांतनु ने बताया कि जब मैं 5 साल का था तब मैंने पहला ट्रेक किया था। शांतनु के मुताबिक मेरे माता-पिता केदारनाथ में आई बाढ़ के दौरान मानसरोवर यात्रा पर गए थे इसके अलावा भूकंप के समय नेपाल भी गए थे। वे जहां भी गए उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने ज्यादा चिंता नहीं की।

23 मई को हुए हादसे के बाद अंजलि कुलकर्णी के शरीर को 30 मई को उनके घर ठाणे में वापस लाया गया था। जिसके बाद 31 मई को उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे शांतनु ने कहा कि अभी भी कोई नहीं मानता है कि वह अब नहीं है। वहीं पति शरद कहते हैं कि हमने 50 वर्ष के जीवन के बाद एक किताब लिखने की योजना बनाई थी। साथ ही एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस, कार्यक्रम और समारोह जैसी कई चीजों की योजना बनाई थी। लेकिन यह सब अब बेकार है, क्योंकि इन सबके लिए मेरी पत्नी जीवित नहीं है।

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