Pune News: पुणे में कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एलपीजी की सप्लाई आंशिक तौर पर फिर से शुरू हो गई है। लेकिन नारायण पेठ, सदाशिव पेठ और नवी पेठ जैसे छात्र इलाकों में कई मेस और खाने-पीने की जगहों पर खाने की कीमतें अभी भी कम नहीं हुई हैं। इससे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों पर और ज्यादा आर्थिक दबाव पड़ रहा है।

नारायण पेठ में रहने वाले शिरडी के एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे गौरव गवारे के लिए यह अंतर साफ है। उन्होंने कहा, “जो थाली हमें पहले 50 रुपये में मिलती थी, अब उसकी कीमत लगभग 70 रुपये है और जो विकल्प अभी भी उपलब्ध हैं, उनमें भी 70 रुपये वाली थाली की कीमत बढ़कर 85-90 रुपये हो गई है।”

चाय और कॉफी भी नहीं रही अछूती

उनकी सुबह की चाय और कॉफी भी इससे अछूती नहीं रही है, कीमतों में 2 रुपये से 5 रुपये प्रति कप की बढ़ोतरी हुई है और गवारे बताते हैं कि कुछ प्रतिष्ठानों में एलपीजी की आपूर्ति फिर से शुरू होने के बावजूद, दरें ऊंची बनी हुई हैं। सदाशिव पेठ में भी यही हाल है। टेक्निकल सर्विस एग्जाम की तैयारी कर रहे अजय सोनावाने बताते हैं कि पोहा और उपमा जैसे नाश्ते के व्यंजन। यह पहले कभी 20 रुपये में मिल जाते थे, लेकिन अब 25 रुपये के हो गए हैं। महीने का मासिक शुल्क पहले 3000 रुपये था। इसमें दो बार का खाना भी शामिल था। हालांकि, अब यह बढ़कर 3500 रुपये से 3800 रुपये के बीच हो गया है।

उन्होंने आगे बताया कि कुछ मेस मालिक अपने खर्चों को कंट्रोल करने में मदद के लिए छात्रों से महीने की शुरुआत में ही अग्रिम भुगतान करने को कह रहे हैं। सोनावाने ने कहा, “एलपीजी की आपूर्ति सुचारू होने के बाद भी, कीमतों में संशोधन होकर एलपीजी संकट से पहले के स्तर पर वापस आने की संभावना बहुत कम है।”

चपाती की कीमत पांच रुपये से बढ़कर सात रुपये हो गई

दत्तावाड़ी के रहने वाले एक व्यक्ति रमेश इरलावार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “इसके अलावा, हमें थाली के लिए भी ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, जिसमें खाने की चीजें घटकर सिर्फ चपाती, एक सब्जी और चावल रह गई हैं। अगर हम घर पर सब्जी बनाते हैं, जो कि सस्ता विकल्प है और खाने की दुकानों से चपाती या भाकरी खरीदते हैं, तो वहां भी कीमतें बढ़ गई हैं। चपाती की कीमत 5 रुपये से बढ़कर 7 रुपये हो गई है और भाकरी की कीमत 12 रुपये से बढ़कर 12-20 रुपये हो गई है।”

जो उम्मीदवार अपने मासिक खर्च के हर रुपये का हिसाब रखते हैं, उनके लिए इस तरह की बढ़ोतरी एक बड़ी असुविधा है। नवी पेठ में रहने वाले और यूपीएससी की तैयारी कर रहे अक्षय किल्लेदार ने कहा, “हम पहले से ही हर रुपये का हिसाब रखते हैं और अपना पूरा दिन पढ़ाई के समय के हिसाब से तय करते हैं। जब एक साधारण थाली जैसी बुनियादी चीज भी महंगी और कभी-कभी अनिश्चित हो जाती है, तो मासिक खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है।”

आपूर्ति के मोर्च पर मिल रहे राहत के कुछ संकेत

आपूर्ति के मोर्चे पर कुछ राहत के संकेत मिले हैं। पुणे रेस्टोरेंट्स एंड होटलियर्स एसोसिएशन (PRAHA) के अध्यक्ष गणेश शेट्टी ने बताया कि हाल ही में कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति फिर से शुरू हो गई है और प्रतिष्ठानों को उनके संचालन के पैमाने के आधार पर एक या दो सिलेंडर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “लगभग 30 से 40 प्रतिशत होटल मालिकों को कमर्शियल गैस सिलेंडर मिल चुके हैं। इससे विशेष रूप से उन छोटे भोजनालयों को राहत मिली है जो सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों, दिहाड़ी मजदूरों और छात्र समुदाय को भोजन परोसते हैं।”

नोएडा में गैस के लिए कतार में खड़े लोग

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी देखने को मिल रही है। लोगों की शिकायतों के बावजूद सरकार ने बार-बार दावा किया है कि ऑनलाइन बुकिंग करने वालों को कुछ दिनों बाद उनके सिलेंडर मिल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर गैस उपभोक्ता बुकिंग के बावजूद कई दिनों तक गैस सिलेंडर न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…