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ठाकोर समाज की मांग- बिहारी मजदूर को फांसी दो, अहमदाबाद के गुप्त कैम्प में छिपे कई हिंदीभाषी

गुजरात में बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात के बाद ठाकोर समाज ने आरोपी को फांसी देने की मांग की है। इस बीच वहां जारी हिंसा से बचने के लिए कई हिंदीभाषी गुप्त कैंप में छिपे हुए हैं।

Author October 9, 2018 2:15 PM
हिंसा की घटना के बाद अहमदाबाद के गुप्त कैम्प में कई हिंदीभाषी छिपे हैं। (Express photo by Ritu Sharma)

गुजरात के सबरकंठा में 14 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात के बाद हिंदीभाषी लोगों के खिलाफ शुरू हिंसा की वारदात अभी थमी नहीं है। उत्तर भारत के काफी लोग वापस लौट गए हैं। जो वापस नहीं लौटे हैं, किसी तरह डर के साये में जी रहे हैं। अहमदाबाद के एक गांव जहां ठाकोर समुदाय की मजबूत पकड़ है, वहां स्थित एक एक फार्म हाउस में उत्तर प्रदेश के कुछ मजदूर छिपे हुए हैं। यह उनका गुप्त ठिकाना है। वहीं, गांव के प्रवेशद्वार पर एक पत्थर के सहारे बैनर रखा हुआ है, जिसमें क्षत्रिय ठाकोर समाज द्वारा बच्ची से रेप के आरोपी बिहारी मजदूर को फांसी देने की मांग की गई है।

जिस फार्म हाउस में हिंदीभाषी रह रहे हैं, वह खेतों के बीच बना हुआ है। चारो ओर से ऊंची दीवार है। लोहे का मुख्य दरवाजा लगा है। मुख्य सड़क से यह नहीं दिखता है। यह एक समाजिक कल्याण संस्था उत्तर भारतीय विकास परिषद द्वारा बनाया गया गुप्त कैंप है। यहां हिंसा से प्रभावित यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश के मजदूरों को आश्रय दिया जा रहा है। परिषद के प्रमुख श्याम सिंह ठाकुर कहते हैं, “स्थिति सामान्य होने तक हिंदीभाषी लोगों के रहने के लिए तात्कालिक व्यवस्था की गई है। हम इस लोकेशन का खुलासा नहीं करना चाहते हैं। हमनें काफी सावधानी से इस एरिया का चुनाव किया है।”

सोमवार (8 अक्टूबर) तक यूपी के 18 से 28 वर्ष की आयु वाले लोग फार्म हाउस की छत पर अपना ठिकाना बना चुके थे। परिषद के सदस्य दीपक दुबे कहते हैं, “यह हिंदभाषियों के लिए सुरक्षित स्थान है। यह गांव वात्वा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो कि राज्य के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा का क्षेत्र है। इसलिए यहां कानून-व्यवस्था की स्थिति सही रहेगी। साथ ही यहां के लोग शिक्षित है। पुलिस, स्थानीय लोग और हमारे संगठन के सदस्यों के बीच लगातार बैठकें होती रही है।” अहमदाबाद स्थित उत्तर भारतीय विकास परिषद की स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी। यह परिषद यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और हरियाणा के ट्रस्टियों द्वारा चलता है। ठाकुर के अनुसार, इसके 32,000 सदस्य हैं जिसमें भाजपा, कांग्रेस, सपा सहित कई पार्टियों के राजनेता भी शामिल हैं।

इस फार्म हाऊस में शरण लिए हुए मजदूर गांधीनगर के देहगम स्थित एक स्नैक्स बनाने वाली कंपनी में काम करते थे। शनिवार की शाम भीड़ फैक्ट्री में घुसी और उनलोगों पर हमला किया। गुजरात छोड़ने की धमकी दी। इसके बाद मजदूर दो और चार के समूह में बंट गए। कानुपर जिले के रहने वाले 18 वर्षीय सुमित गौतम, जो पिछले नौ महीनों से 6 हजार रुपये प्रतिमाह की मजदूरी पर काम कर रहे थे, कहते हैं, “हम उत्तर प्रदेश से हैं, इसलिए अकेले हैं। जैसे ही दूसरे लोगों ने फैक्ट्री के आसपास के इलाकों को छोड़ना शुरू किया, हम भी शनिवार की शाम अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए।” समूह के दूसरे सदस्य सलमान खान कहते हैं, “हम प्राइवेट जीप में चार से ज्यादा लोगों के समूह में नहीं थे, इसके बावजूद बाइक से हमारा पीछा किया गया। हम सभी पूरी तरह डरे हुए थे। जब हम नरोल पहुंचे, किसी ने हमें परिषद का हेल्पलाइन नंबर दिया और उनसे संपर्क करने को कहा। इस तरह से हम यहां पहुंचे।” फार्म हाऊस में रह रहे लोगों ने लंच में पूड़ी-भुंजिया खाने के बाद अपने-अपने मोबाइल फोन ऑन किया और स्थिति का जायजा लेने में लग गए।

उत्तर प्रदेश के औरैया के रहने वाले 20 वर्षीय भोला प्रजापति की शादी छह महीने पहले हुई थी। वे कहते हैं, “हम यह नहीं समझ पा रहे कि निर्दोष लोगों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? जिसने अपराध किया है, उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन निर्दोष लोगों को परेशान क्यों किया जा रहा है?” कानपुर जिले के रहने वाले 28 वर्षीय पिंटू प्रजापति कहते हैं, “हमारे परिजन दहशत में हमें फोन कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि जितनी जल्दी हो जाए, वो वापस आ लौट जाए। वे यहां छह सालों से काम कर रहे हैं। हर महीने 15 हजार वेतन मिलता है। पत्नी, बच्चे, माता-पिता सभी गांव पर रहते हैं। इस घटना के बाद से सभी दहशत में हैं। हमें फैक्ट्री के मालिक द्वारा स्थिति सामान्य होने तक वहां से जाने को कह दिया गया। कई लोग फैक्ट्री से जा चुके हैं। फैक्ट्री बंद हो चुकी है।” परिषद के वोलेंटियर पवन सिंह राजपुत कहते हैं, “फार्म हाऊस के गेट पर सुरक्षाकर्मी को तैनात किया गया है। अहमदाबाद के आसपास के औद्योगिक क्षेत्र से मजदूर यहां आ रहे हैं। कुछ महिला भी यहां पहुंची। हम सभी के लिए उचित व्यवस्था कर रहे हैं।”

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