राणे जैसा बयान दो साल पहले ठाकरे ने योगी के लिए दिया था; बोले थे – “ऐसा लग रहा है उसी चप्पल से उसे मारूं”, यूपी के सीएम ने मामले को नहीं दिया था तूल

शिवाजी को माल्यार्पण करते समय योगी खड़ाऊं पहने थे, इस पर ठाकरे भड़क उठे थे, लेकिन आदित्यनाथ ने कहा था- “मेरे अंदर उनसे कहीं ज्यादा शिष्टाचार है और मुझे उनसे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।”

Maharashtra, Narayan Rane
महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

राजनेताओं के बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं तो मीडिया के लिए वे बड़ी खबरें होती हैं। करीब-करीब सभी दलों में कुछ ऐसे नेता होते हैं, जो बीच-बीच में प्रतिद्वंद्वी या विरोधी दलों के खिलाफ कुछ न कुछ बोलकर खुद को चर्चा में बनाए रखते हैं। कई लोग तो ऐसा जानबूझकर करते हैं तो कई नेता अंजाने में भी ऐसा बोल जाते हैं। ऐसा होता तो सभी दलों में है, लेकिन हर नेता को अपनी पार्टी के बजाए दूसरी पार्टी के नेताओं के बयान आपत्तिजनक लगते हैं।

हाल ही में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के बारे में कुछ ऐसी बातें कहीं, जिस पर हंगामा हो गया और उनकी गिरफ्तारी तक की नौबत आ गई। उन पर कार्रवाई इसलिए हुई, क्योंकि महाराष्ट्र में इस समय शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार है और नारायण राणे इस वक्त भाजपा में हैं। अगर यही बयान नारायण राणे पिछली सरकार में दिए होते, जब महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा का गठबंधन था, तब शायद इसकी चर्चा भी नहीं होती।

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उद्धव ठाकरे के लिए नारायण राणे का बयान विवादास्पद बन गया, लेकिन इससे पहले मई 2018 में खुद उद्धव ठाकरे ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए कुछ ऐसा ही कहा था, हालांकि आदित्यनाथ ने उनके बयान को ज्यादा तूल नहीं दिया। इससे उस पर कार्रवाई नहीं हो सकी। पालघर में एक चुनाव प्रचार के दौरान उद्धव ठाकरे इस बात से नाराज हो गए थे कि शिवाजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते वक्त योगी आदित्यनाथ ने खड़ाऊं पहन रखे थे। उनकी नजर में यह शिवाजी का अपमान है।

उन्होंने कहा, “यह योगी तो गैस के गुब्बारे की तरह है, जो सिर्फ हवा में उड़ता रहता है। आया और सीधे चप्पल पहनकर महाराज के पास चला गया। ऐसा लग रहा है उसी चप्पल से उसे मारूं।” उस वक्त तक शिवसेना और भाजपा अलग हो चुकी थी।

ठाकरे के बयान पर योगी आदित्यनाथ ने भी सधी हुई प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, “मेरे अंदर उनसे कहीं ज्यादा शिष्टाचार है और मैं जानता हूं कि कैसे श्रद्धांजलि दी जाती है। मुझे उनसे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।”

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