Temple Economy Ayodhya: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ ने अयोध्या की कायापलट कर दी है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) लखनऊ की नवीनतम केस स्टडी “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) ने यह साबित कर दिया है कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या न केवल एक आध्यात्मिक केंद्र, बल्कि भारत का एक बड़ा आर्थिक इंजन बनकर उभरी है।
रिपोर्ट में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक स्थितियों का गहरा विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पहले की स्थिति की बात करें तो अयोध्या की अर्थव्यवस्था केवल स्थानीय तीर्थाटन तक सीमित थी। सालाना आगंतुकों की संख्या महज 1.7 लाख थी और स्थानीय दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400-₹500 तक सिमटी हुई थी।
अब क्या है स्थिति?
अब की वर्तमान स्थिति की बात करें तो प्राण प्रतिष्ठा के शुरुआती 6 महीनों में ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय 5 गुना बढ़कर ₹2,500 तक पहुंच गई है।
आईआईएम लखनऊ की रिपोर्ट बताती है कि अयोध्या का विकास अब पूरे प्रदेश के राजस्व में बड़ी भूमिका निभा रहा है। कर राजस्व की बात करें तो पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा व्यापारिक टर्नओवर की बात करें तो प्राण प्रतिष्ठा के चलते देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की सबसे प्रमुख हिस्सेदारी रही।
नौकरी और रोजगार
रियल एस्टेट के लिहाज से बात करें तो मंदिर के आसपास जमीन की कीमतों में 5 से 10 गुना तक का उछाल देखा गया है। इसके अलावा रोजगार के भी खूब अवसर मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या अब उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार का हब बन रही है। MSME सेक्टर के तहत अयोध्या में लगभग 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्थापित हुए हैं।
इसके अलावा नौकरियों की बात करें तो अनुमान है कि अगले 4-5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्रों में 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। अयोध्या में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे शुरू हुए हैं। ताज, मैरियट और विंडहैम जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय होटल श्रृंखलाएं अब अयोध्या में निवेश कर रही हैं।
अयोध्या: एक मॉडल सोलर सिटी
विकास केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। सरकार अयोध्या को एक “मॉडल सोलर सिटी” के रूप में विकसित कर रही है। ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाओं के साथ, यहां इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दी जा रही है, जो सतत शहरी विकास का एक उदाहरण पेश करता है। पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व का परिणाम है भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता: सीएम योगी
