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एक तीर से दो शिकार: कांग्रेस-टीडीपी के गठबंधन से उड़ी बीजेपी की नींद, केसीआर भी बेचैन?

तेलंगाना की 119 सदस्यीय विधान सभा में टीआरएस के पास कुल 63 विधायक हैं। 21 सीटों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी रही है जबकि टीडीपी 15 विधायकों के साथ तीसरी बड़ी पार्टी है।

आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के साथ गठबंधन कर दक्षिण भारत में नई राजनीति का आगाज किया है। मंगलवार (11 सितंबर) को तीनों दलों ने तेलंगाना में महागठबंधन कर चुनाव लड़ने का एलान किया। गठबंधन बनाने के फौरन बाद तीनों दलों के नेताओं ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख और सीएम के चंद्रशेखर राव के विधान सभा भंग करने के फैसले को अलोकतांत्रिक करार दिया और राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन से मुलाकात कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। 36 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब टीडीपी ने किसी दूसरे राज्य में कांग्रेस से गठबंधन किया हो। हालांकि, आंध्र प्रदेश में टीडीपी बीजेपी के साथ गठबंधन में रह चुकी है। दरअसल, कांग्रेस के विरोध में ही 36 साल पहले यानी 29 मार्च, 1982 को टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू के ससुर और पूर्व सीएम एनटी रामाराव ने आंध्र प्रदेश में टीडीपी की स्थापना की थी।

तब से अब तक टीडीपी कांग्रेस विरोध की राजनीति करती रही है। इसी साल मार्च में टीडीपी ने बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए से नाता तोड़ लिया था। अब नए समीकरण की नए राजनीतिक मायने लगाए जा रहे हैं। दरअसल, विधान सभा चुनाव से पहले हुआ यह गठबंधन जारी रहा तो साल 2019 के लोकसभा चुनावों में इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। आंध्र प्रदेश से लोकसभा की कुल 25 सीटें आती हैं जबकि तेलंगाना से कुल 17 लोकसभा सीटें आती हैं। 2014 में दोनों राज्यों को मिलाकर कुल 42 सीटों में से टीडीपी को 16, टीआरएस को 11, वाईएसआर कांग्रेस को 9, बीजेपी को 3 और कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिली थी।

विधान सभाओं की स्थिति देखें तो तेलंगाना की 119 सदस्यीय विधान सभा में टीआरएस के पास कुल 63 विधायक हैं। 21 सीटों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी रही है जबकि टीडीपी 15 विधायकों के साथ तीसरी बड़ी पार्टी है। एआईएमआईएम (7 सीट) के बाद बीजेपी (पांच सीट) पांचवी पार्टी है। आंध्र प्रदेश की 175 सदस्यों वाली विधान सभा में 2014 के चुनाव में टीडीपी को 103 सीटें मिली थीं जबकि वहां वाईएसआर कांग्रेस 66 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी पार्टी रही है। तीसरे नंबर पर बीजेपी (चार सीट) रही है। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। माना जा रहा है कि तेलंगाना में कांग्रेस 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि 25-30 सीटें टीडीपी के खाते में और शेष वाम दलों को मिल सकती हैं।

दरअसल, कांग्रेस की नजर लोकसभा चुनावों और उसके नतीजों पर है। कांग्रेस तकरीबन सभी राज्यों में गठबंधन बना रही है। टीडीपी से गठजोड़ करने के बाद न केवल महागठबंधन का दायरा बढ़ेगा बल्कि अब चंद्रबाबू के एनडीए में जाने का खतरा भी नहीं रहेगा। कांग्रेस और टीडीपी के गठजोड़ से तेलंगाना में केसीआर को 2014 जैसी जीत दोहरा पाना भी मुश्किल हो सकता है। बीजेपी और टीआरएस दोनों ने इस गठबंधन को नापाक बताया है।