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ओवैसी पर मेहरबान तेलंगाना सरकार: बेहद कम कीमत में दे दी 40 करोड़ की जमीन

रविवार को आयोजित की गई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। करीब 40 करोड़ रुपये की कीमत वाली ये जमीन ओवैसी अस्पताल को या तो लीज पर या फिर नाममात्र के दामों पर दी जाएगी।

AIMIM विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी।Express Photo by Kevin D’souza.

तेलंगाना सरकार ने ओवैसी अस्पताल और रिसर्च सेंटर को बेहद पॉश इलाके में 6,500 गज जमीन देने का फैसला किया है। ये भूखंड चंद्रायनगुट्टा के पास बंदलागुदा में स्थित है। इस अस्पताल के कर्ताधर्ता आॅल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी हैं। रविवार को आयोजित की गई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। करीब 40 करोड़ रुपये की कीमत वाली ये जमीन ओवैसी अस्पताल को या तो लीज पर या फिर नाममात्र के दामों पर दी जाएगी। गौरतलब है कि, राज्य सरकार ने बीते कई सालों तक इस जमीन के मालिकाना हक के लिए मुकदमा लड़ा है। यही नहीं इससे पहले हैदराबाद के जिला प्रशासन और राजस्व विभाग द्वारा साल 2009 में जारी किया गया अनापत्ति प्रमाणपत्र भी रद कर दिया गया। बाद में इस जमीन पर कब्जा ले लिया गया।

टीओआई की खबर के मुताबिक, एमआईएम प्रमुख असदउददीन ओवैसी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से कुछ​ दिनों पहले मुलाकात की थी। ओवैसी ने उनसे वह जमीन ओवैसी अस्पताल के विस्तार के लिए देने की अपील की थी। ये भूखंड ओवैसी के अस्पताल के ठीक पीछे ही मौजूद है। मुख्यमंत्री इस मांग पर कथित तौर पर तैयार हो गए थे और उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि वह रविवार को होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में इस संबंध का प्रस्ताव रखें।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि सीएम के. चंद्रशेखर राव ने अपने मित्र पार्टी के नेता के निवेदन पर भूमि को या तो आवंटित करने या फिर 99 साल की लीज पर देने या नाममात्र की कीमतों पर देने का फैसला किया है। ये फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि ये अस्पताल गरीबों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाता है। साल 2012-13 में अस्पताल प्रबंधन ने मसब टैंक के पास भी अस्पताल बनाना चाहता था। लेकिन उस वक्त जमीन लेने की कोशिश में सफलता नहीं मिल सकी थी।

रिपोर्ट में राजस्व विभाग के अधिकारियों के हवाले से लिखा गया है कि बंदलागुदा के पिसलबंदा गांव में कुल सरकारी रिहायशी भूमि की नाप 12,350 वर्ग गज या 2.57 एकड़ है। इस जमीन पर मालिकाना हक का दावा खाजा बेगम और चार अन्य कर रहे थे। इस भू प्रबंधन के मुख्य आयुक्त ने साल 2012 में उनके अनापत्ति प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया। इसके बाद राजस्व विभाग ने इस भूमि पर कब्जा ले लिया और इसका कुछ हिस्सा अभी खाली पड़ा है।

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