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प्यार की मिसाल: रिटायर्ड कर्मचारी ने बनावा दिया पत्नी का मंदिर, रोज चढ़ाता है फूल

चंद्रगौड़ ने यह मंदिर तेलंगाना के सि्धिपेत जिले के गोसानीपल्ली में बनवाया है। इस मंदिर में चंद्रगौड़ की पत्नी की मूर्ति बनवाई गई है। प्रेम की निशानी के तौर पर बनाई गई इस मंदिर में लोग अक्सर उनकी पत्नी की मूर्ति को देखने आते हैं।

तेलंगाना में शख्स ने पत्नी की याद में बनवाई मूर्ति। फोटो सोर्स – फेसबुक

दुनिया में मुहब्बत की निशानियां कई हैं। उत्तर प्रदेश के आगरे जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल भी प्यार की एक ऐसी ही अनूठी निशानी है जिसे कभी शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज बेगम की याद में बनवाया था। लेकिन अब तेलंगाना के रहने वाले एक शख्स का नाम भी उन लोगों की फेहरिस्त में शामिल होगा जिनके प्यार के निशां सालों तक जमीं पर मौजूद रहते हैं। इस शख्स ने अपनी पत्नी के मरने के बाद मृत पत्नी की याद में मंदिर बनवाया है। चंद्रगौड़ तेलंगाना के बिजली विभाग के सेवानिवृत कर्मचारी हैं। उनकी पत्नी राजमणि की मौत खराब स्वास्थ्य की वजह से हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी की याद में मंदिर बनवा दिया।

चंद्रगौड़ ने यह मंदिर तेलंगाना के सि्धिपेत जिले के गोसानीपल्ली में बनवाया है। इस मंदिर में चंद्रगौड़ की पत्नी की मूर्ति बनवाई गई है। प्रेम की निशानी के तौर पर बनाई गई इस मंदिर में लोग अक्सर उनकी पत्नी की मूर्ति को देखने आते हैं। चंद्रगौड़ खुद हर रोज इस मंदिर में आते हैं और अपनी पत्नी की पूजा करते हैं। आस-पास के लोग सच्चे प्यार की इस निशानी की प्रशंसा करते नहीं थकते।

बिहार के गया में दशरथ मांझी का नाम भी उन लोगों की फेहरिस्त में शुमार है जो अपनी पत्नी से बेइंतहा मोहब्बत करते थे और अपनी पत्नी की याद में उन्होंने बेमिसाल काम किया है। दशरथ मांझी की पत्नी को पानी लाने के लिए हर रोज कोसों दूर पैदल चल कर जाना पड़ता था। वजह थी रास्ते में आने वाली पहाड़। दशरथ मांझी से जब अपनी पत्नी का यह कष्ट नहीं देखा गया तो उन्होंने पहाड़ काटकर अपनी पत्नी के लिए रास्ता बना दिया। आज उस रास्ते से गांव के लोग पानी लाने जाया करते हैं।

पत्नी की याद में पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले दशरथ मांझी को ‘माउंटेन कटर’ के नाम से भी जाना जाता है। इतना ही नहीं दशरथ मांझी की जीवनी पर बनी फिल्म रुपहले पर्दे पर भी आ चुकी है।

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