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‘तुम तो ब्राह्मण हो, सिंदूर क्यों नहीं लगाती?’, गिरफ्तार वरवरा राव की बेटी-दामाद ने पुलिसवालों पर लगाए गंभीर आरोप

"आप इतनी सारी किताबें क्यों खरीदते हैं? आप इतनी किताबें क्यों पढ़ते हैं, आप माओ और मार्क्स पर किताबें क्यों पढ़ते हैं? आपके पास चीन में प्रकाशित किताबें क्यों है? आपके पास गदर के गाने क्यों है? आपके घर में ज्योतिबा फुले और अंबेडकर की तस्वीरें क्यों हैं? लेकिन आपके घर में देवताओं की तस्वीरें नहीं हैं।"

वरवरा राव के दामाद प्रोफेसर के सत्यनारायण।

“आपके पति दलित हैं, इसलिए वह किसी परंपरा का पालन नहीं करते हैं, लेकिन आप तो ब्रह्माण है, तो आप गहने क्यों नहीं पहनती हैं, आप सिंदूर क्यों नहीं लगाती हैं, आप एक पारंपरिक पत्नी जैसे कपड़े क्यों नहीं पहनती हैं, क्या बेटी को भी बाप के जैसा ही होना चाहिए?” ये कुछ ऐसे सवाल है जो पुणे पुलिस ने कोरेगांव हिंसा मामले में नजरबंद वरवरा राव की बेटी के पवन से पूछे थे।

के पवन प्रोफेसर के सत्यनारायण की पत्नी हैं। के सत्यनारायण हैदराबाद के इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी (EFLU) में कल्चरल स्टडीज विभाग के एचओडी हैं। पुलिस मंगलवार 28 अगस्त को EFLU कैंपस में उनके घर की तलाशी ले रही थी। बता दें कि पुणे पुलिस ने लेखक और एक्टिविस्ट वरवरा राव समेत पांच लोगों को महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में 1 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक इन्हें घर में ही नजरबंद रखने को कहा है।

पूरी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए वरवरा राव के दामाद के सत्यनारायण ने कहा है कि उनके घर पुणे पुलिस और तेलंगाना स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरों के अधिकारी आए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस की तलाशी बेहद ‘मानसिक तनाव देने वाली और अपमानजनक’ रही। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनलोगों से चिढ़ाने वाले और बेवकूफाना किस्म के सवाल पूछे। प्रोफेसर सत्यनारायण ने कहा, ” पहले तो उन्होंने कहा कि वे वरवरा राव की तलाश कर रहे हैं…जो मेरे ससुर हैं…जब वे उन्हें नहीं मिले, वे किताबों की आलमारी, कबर्ड में खोजने लगे, उन्होंने कहा कि वे माओवादियों से जुड़े लिंक खोज रहे हैं…उन्होंने पूछा कि क्या वरवरा राव मेरे घर में छुपे हुए हैं…पुणे और तेलंगाना के 20 पुलिसकर्मियों ने सुबह 8.30 बजे से लेकर शाम 5.30 बजे तक मेरे घर में कोहराम मचा दिया।”

के सत्यनारायण ने कहा कि पुलिस के सवाल काफी बचकाने थे। उन्होंने कहा, “वे मुझसे पूछने लगे, तुम्हारे घर में इतनी सारी किताबें क्यों हैं, क्या आप इन सभी को पढ़ते हैं? आप इतनी सारी किताबें क्यों खरीदते हैं?  आप इतनी किताबें क्यों पढ़ते हैं? आप माओ और मार्क्स पर किताबें क्यों पढ़ते हैं? आपके पास चीन में प्रकाशित किताबें क्यों है? आपके पास गदर के गाने क्यों हैं? आपके घर में ज्योतिबा फुले और अंबेडकर की तस्वीरें क्यों हैं? लेकिन आपके घर में देवताओं की तस्वीरें नहीं हैं?”

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प्रोफेसर सत्यनारायण ने कहा कि एक ऑफिसर ने किताबों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे कई सारे किताबें पढ़ रहे हैं और छात्रों को बर्बाद कर रहे हैं। प्रोफेसर सत्यनारायण कहते हैं, “एक शिक्षाविद और एक टॉप यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रुप में मैंने खुद को काफी अपमानित महसूस किया, शिक्षा से जुड़े होने की वजह से कम कई तरह की किताबें पढ़ते हैं, चाहे वे लेफ्ट, राइट या फिर दलित विचारधारा से जुड़ी हुई हो…इससे फर्क नहीं पड़ता है, उन्होंने दलितों से जुड़े किताबों पर सवाल पूछे, उन किताबों पर सवाल पूछे जिनके कवर लाल थे।”

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