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भारतीय नागरिकता पाने को 20 साल से कर रही संघर्ष, 8 महीने के लिए चली गई थी पाकिस्तान

महिला अब 75 साल की हो चुकी है। उनके पित और बेटा इस दुनिया में नहीं हैं। वह अकेले ही अब दो बेटियों की देखभाल करती हैं। इसपर महिला के भाई कहते हैं कि वह भारत में ही पैदा हुई और मौत तक भारत में रहेंगी।

अधिकारियों के नियमों के मुताबिक हर वो शख्स भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है जो पिछले सात सालों से भारत में रह रहा हो। (फोटो सोर्स एएनआई)

भारत में जन्मी मुस्लिम महिला ने सरकार से भारतीय नागरिकता देने की गुहार लगाई है। 75 साल की हबीबुननिसा बेगम का जन्म भारत के ही हैदराबाद शहर में हुआ। साल 1955 में शादी के बाद वह पति संग पाकिस्तान चली गई थीं। हालांकि उनके भाई का दावा है कि करीब आठ महीने बाद वह वापस अपने वतन लौट आईं और तबसे भारत में ही रह रहीं हैं। मामले में बेगम के भाई ने बताया कि बहन अब 75 साल की हो गईं। हम करीब 20 सालों से उन्हें भारतीय नागरिकता देने का इंतजार कर रहे हैं। 1997 में उन्होंने भारत की नागरिकता देने के लिए आवेदन किया था।

एनडीटीवी की वेबसाइट के मुताबिक बेगम के भाई तौफीक अली ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, ‘मेरी बहन की शादी भारत के हैदराबाद में हुई थी। तब उनके पति के भाई, जो पाकिस्तान में रहते थे, अच्छी जिंदगी के लिए उन्हें पाकिस्तान ले गए। दोनों पाकिस्तान इंडो-पाक बोर्डर के जरिर गैर कानूनी रूप से पहुंचे। वहां हबीबुननिसा कुछ महीने के लिए रुकीं।’

चूंकि पाकिस्तान पहुंची हबीबुननिशा को कुछ दिनों में अहसास हो गया कि वहां नौकरी के अवसरों की बहुत कमी है। वहां रोजमर्रा की चीजों के लिए भी खासी परेशानी उठानी पड़ रही थी। इसपर उन्होंने भारत वापस लौटने का फैसला लिया। तौफीक अली कहते हैं, ‘मेरी बहन ने अपने पति से कहा कि पाकिस्तान छोड़कर वापस भारत जाना चाहती हैं। उस समय वह बॉर्डर के जरिए भारत में नहीं आ सकते थे, चूंकि वह बंद हो चुका था। बाद में उनके पति ने पाकिस्तानी पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। पासपोर्ट मिलने के बाद दोनों जहाज के जरिए भारत लौट आए।’

तौफीक अली कहते हैं कि 1987 में हमने पाकिस्तान पासपोर्ट के नवीकरण के लिए आवेदन किया। बाद में पासपोर्ट फिर 1992 में एक्स्पायर्ड हो गया। हालांकि हमने फिर पासपोर्ट, पाकिस्तान एंबेसी में जमा कर दिया और इसे रद्द कराने के लिए आवेदन किया। पाकिस्तान पासपोर्ट छोड़ने का पत्र 1997 में मिल गया। पूरे मामले के निपटारे के बाद हमने तुरंत बहन को भारत की नागरिकता दिलवाने के लिए आवेदन किया। बीस साल बाद तक भी उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।

अली के मुताबिक उन्होंने अपनी बहन संग हैदराबाद के विभिन्न संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की। बस वो सिर्फ हमें यहां रहने दे रहे हैं लेकिन बहन को भारत की नागरिकता नहीं दे रहे।

उन्होंने आगे कहा, ‘हबीबुननिसा अब 75 साल की हो गईं, उनके पति और बेटा इस दुनिया में नहीं हैं। अब वह अपनी दो बेटियों की देखभाल कर रही हैं। मैं भारतीय सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरी बहन की मदद करें। उन्हें भारत की नागरिकता दी जाए। वह सिर्फ आठ महीने के लिए पाकिस्तान में रुकी थीं। वहां से लौटने के बाद से अब तक उन्हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वो यहीं पैदा हुईं है और यहीं मर जाएंगी।’

यहां बता दें कि अधिकारियों के नियमों के मुताबिक हर वो शख्स भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है जो पिछले सात सालों से भारत में रह रहा हो।

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