Mecca Masjid blast case: Swami Aseemanand gets bail - मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट मामले में पूर्व आरएसएस सदस्‍य स्‍वामी असीमानंद को जमानत - Jansatta
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मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट मामले में पूर्व आरएसएस सदस्‍य स्‍वामी असीमानंद को जमानत

मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट में 16 लोगों की जान गई थी। यह ब्‍लास्‍ट 18 मई 2007 को चारमीनार के पास हुआ था।

Author नई दिल्‍ली | March 23, 2017 7:01 PM
हैदराबाद की एक अदालत ने स्‍वामी असीमानंद को मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट मामले में स्‍वामी असीमानंद को जमानत दे दी है।

हैदराबाद की एक अदालत ने स्‍वामी असीमानंद को मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट मामले में स्‍वामी असीमानंद को जमानत दे दी है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार असीमानंद को गुरुवार (23 मार्च) को कोर्ट ने जमानत देने का आदेश दिया। उन्‍हें औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जेल से रिहा कर दिया जाएगा। कोर्ट ने असीमानंद को 50 हजार रुपये के दो मुचलके भरने को कहा है। साथ ही हैदराबाद से बाहर ना जाने का आदेश भी दिया है। उनके साथ ही एक अन्‍य संदिग्‍ध भारत भार्इ को भी जमानत दी है। बता दें कि मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट में 16 लोगों की जान गई थी। इनमें से नौ की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह ब्‍लास्‍ट 18 मई 2007 को चारमीनार के पास हुआ था।

असीमानंद पर धमाके की साजिश रचने का आरोप है। वह पहले आरएसएस के सदस्‍य थे। मक्‍का मस्जिद मामले की जांच कर रही सीबीआई ने असीमानंद को नवंबर 2010 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद इस मामले को राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया था। एनआईए की ओर से मई 2011 में चार्जशीट दायर की गई थी। इसके बाद से इस केस में जांच एजेंसी की ओर से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है। असीमानंद ने पहले इस मामले में दक्षिणपंथी संगठनों के लोगों के शामिल होने की बात कबूली थी। हालांकि बाद में वे अपने बयान से पलट गए थे। असीमानंद का नाम अजमेर दरगाह ब्‍लास्‍ट में भी आया था लेकिन अदालत ने उन्‍हें बरी कर दिया था। हालांकि समझौता एक्‍सप्रेस और मालेगांव धमाकों में वह अभी भी सह आरोपी हैं।

बता दें कि अजमेर दरगाह मामले में अदालत ने हाल ही में फैसला सुनाया है। इसमें भावेश जोशी और देवेंद्र गुप्‍ता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर की मशहूर सूफी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के अहाता-ए-नूर के पास बम धमाका हुआ था। धमाके में 3 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 15 अन्य घायल हुए थे। जांच के बाद मालूम हुआ कि धमाके के लिए दरगाह में दो रिमोट बम प्लांट किए गए थे, लेकिन इनमें से एक ही फटा जिससे भारी जनहानि नहीं हुई। इस मामले के एक दोषी सुनील जोशी की मौत गई थी।

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