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खुफिया ब्रांच की रिपोर्ट में खुलासा, 35 जिलों में दो लाख माओवादियों के पास 10,000 हथियार

माओवादी हर साल वहां के लोगों से 120 से 150 करोड़ रुपये की उगाही करते हैं।

प्रतीकात्मक फोटो। (File Photo)

तेलंगाना पुलिस की विशेष खुफिया शाखा की एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें दावा किया गया है कि 35 जिलों में माओवादियों की संख्या करीब 2 लाख है। इनके पास 10,000 हथियार हैं। इन हथियारों में 4,000 हथियार ब्रांडेड हैं। रिपोर्ट में पुलिस ने दावा किया है कि माओवादी हर साल 120 से 150 करोड़ रुपये की उगाही करते हैं। वह ये उगाही कॉन्ट्रेक्टर, उद्योगपति आदि से करते हैं। डेक्कन क्रोनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक सीआरपीएफ के पूर्व चीफ कोडे दुर्गा प्रसाद ने बताया कि माओवादी लोगों को डरा-धमकाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं और उसी पैसे से इनका खर्च चलता है। उन्होंने बताया कि माओवादियों की 24 सदस्यों की सेंट्रल कमेटी के आधे लोगों को एनकाउंटर में मार गिराया या उन्होंने सरेंडर कर दिया या फिर गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि माओवादियों के पोलित ब्यूरो की ताकत कम हुई है।

माओवादियों के कार्यकर्ता घट रहे हैं और नए लोगों को जोड़ने में उन्हें दिक्कतें आ रही हैं। छत्तसीगढ़ के सुकमा जिले में सीआरपीएफ जवानों पर किए हमले में बड़ी संख्या में मिलिशिया सदस्य थे। सीआरपीएफ के एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुदीप लखटकिया ने कहा सुरक्षा बलों पर हमला हो रहा है, आदिवासी क्षेत्रों में परिचालन संबंधी खतरा है। वहां माओवादियों और उनकी सहायता करने वाले मिलिशिया बड़ी संख्या में हैं। हाल में हुए हमले पर कहा कि हमले के दौरान मिलिशिया सदस्य माओवादियों से पांच गुना ज्यादा थे।

छत्तीसगढ़ में माओवादियों का समर्थन करने वाले आदिवासियों के बारे में लखटकिया ने कहा कि उन्हें माओवादियों से खतरा है। वह उन्हें डराते हैं। अपने अस्तित्व को बचाने के लिए माओवादी बड़े हमलों का सहारा ले रहे हैं। वे अब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य की सीमा के दक्षिण छत्तीसगढ़ पर फोकस कर रहे हैं। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के सोशियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर नंदिनी सुंदर ने बताया कि पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी, माओवादियों के सशस्त्र संगठन में दो सैन्य बटालियंस हैं, जो दूरदराज के इलाकों में सक्रिय हैं। नंदिनी सुंदर ने आदिवासी क्षेत्र में बहुत काम किया है। उन्होंने कहा कि एकमात्र स्थायी समाधान उनसे बातचीत और उनके जमीन और जंगल के ऊपर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करना था। सुरक्षा बल यह दावा कर रहे हैं कि माओवादियों को उन्होंने खत्म कर दिया है और वह अब ज्यादा नहीं बचे हैं। नंदनी सुंदर ने कहा कि जब तक उनके मुद्दों का समाधान नहीं होता तब तक सीआरपीएफ के जवान भेजना भी उपयोगी नहीं होगा।

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