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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- हिन्दूवादी ताकतों के लिए सबक है चेन्नई में जल्लीकट्टू पर बैन का विरोध

ओवैसी ने लिखा है, "यूनिफॉर्म सिविल कोड इस देश पर नहीं थोपा जा सकता है, हमलोग एक ही संस्कृति को नहीं मान सकते।"

Asaduddin Owaisi news, Asaduddin Owaisi latest news, Asaduddin Owaisi vs Akhilesh Yadav, Akhilesh Yadav manifesto, Asaduddin Owaisi Muzaffarnagar Riotsएआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। (पीटीआई फाइल फोटो)

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन और हंगामे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-एत्तिहाद के चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं। शुक्रवार को उन्होंने इस विवाद को यूनिफॉर्म सिविल कोड से जोड़ते हुए कहा कि इससे हिन्दूवादी ताकतों को सीख लेनी चाहिए। ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा है कि किसी भी देश में एक ही तरह का कानून लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि वहां अलग-अलग संस्कृतियां हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “यह हिन्दूवादी ताकतों के लिए एक सीख है। यूनिफॉर्म सिविल कोड इस देश पर नहीं थोपा जा सकता है, हमलोग एक ही संस्कृति को नहीं मान सकते।”

ओवैसी अक्सर अपने विवादित बयानों से चर्चा में रहते हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि यूनिफॉर्म सिविल कोड देशहित में नहीं है। ओवैसी का यह ट्वीट तब आया है जब तमिलनाडु में हजारों लोग जल्लीकट्टू पर लगे बैन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने  कुछ दिनों पहले साल 2014 में जल्लीकट्टू पर लगाए गए प्रतिबंध पर राज्य सरकार की याचिका पर कोई राहत देने से इनकार कर दिया और उस याचिका को खारिज कर दिया ।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू के मुद्दे पर एक सप्ताह तक फैसला नहीं सुनाने का केंद्र का आग्रह शुक्रवार को मान लिया। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि मुद्दे के समाधान को लेकर वह तमिलनाडु के साथ बातचीत कर रहा है। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ को बताया कि जल्लीकट्टू से तमिलनाडु के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं और केंद्र तथा राज्य सरकार इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। रोहतगी ने पीठ से कहा, ‘केंद्र और राज्य समाधान निकालने के लिए बातचीत कर रहे हैं और हमारा अनुरोध है कि न्यायालय कम से कम एक सप्ताह तक इस पर अपना फैसला ना सुनाए।’ उनके इस आग्रह पर पीठ ने कहा ‘ठीक है’।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि सांडों को काबू में करने के खेल के प्रदर्शनकारी समर्थकों के संरक्षण का मुद्दा मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया जा सकता है। खेल को इजाजत देने संबंधी केंद्र की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सात दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके अगले दिन, केंद्र ने अधिसूचना जारी कर तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर पाबंदी हटा ली थी हालांकि इसके बावजूद कुछ पाबंदियां कायम रखी गई थीं। इसे एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया, पेटा, बेंगलुरू के एक गैर सरकारी संगठन समेत अन्य ने उच्चतम सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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