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ISRO ने कहा, भारत के पास जल्द होगी मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता, 2022 तक देश रचेगा इतिहास

इसरो के प्रमुख के. सिवन ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होगा। अंतरिक्ष स्टेशन एक ऐसा अंतरिक्ष यान होता है, जिसकी डिजाइन इस तरह से तैयार की जाती है कि वह अंतरिक्ष में लंबे समय तक बना रहे और वहां क्रू के सदस्य समय बिता सकें तथा वहां अन्य अंतरिक्ष यान के ठहरने की व्यवस्था होती है।

Author हैदराबाद | Updated: June 14, 2019 4:57 PM
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वह भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण की योजना से वाकई में बहुत रोमांचित हैं। अंतरिक्ष विभाग के पूर्व सचिव रहे नायर ने इसरो के ‘गगनयान’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास 2022 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता होगी।

प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक जी. माधवन नायर ने इसरो के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण को ‘‘बेहद रोमांचक’’ परियोजना बताते हुए शुक्रवार को कहा कि यह भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में उसकी अग्रणी भूमिका बनाये रखने में मदद करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वह भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण की योजना से वाकई में बहुत रोमांचित हैं। अंतरिक्ष विभाग के पूर्व सचिव रहे नायर ने इसरो के ‘गगनयान’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास 2022 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘इस (गगनयान) परियोजना के बाद खगोलीय अवलोकन के लिये अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना करना अगला तर्कसंगत कदम होने वाला है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर ऐसी परियोजनाओं को साकार करने, डिजाइन तैयार करने, इस दिशा में आगे बढ़ने तथा उसे लागू करने में समय लगता है। इसलिए अगर सरकार ने ऐसी परियोजना पर ध्यान दिया है तो मैं समझता हूं कि जहां तक इसरो का संबंध है, उसके लिये यह अब तक की सबसे रोमांचक परियोजना है।’’

इसरो के प्रमुख के. सिवन ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होगा। अंतरिक्ष स्टेशन एक ऐसा अंतरिक्ष यान होता है, जिसकी डिजाइन इस तरह से तैयार की जाती है कि वह अंतरिक्ष में लंबे समय तक बना रहे और वहां क्रू के सदस्य समय बिता सकें तथा वहां अन्य अंतरिक्ष यान के ठहरने की व्यवस्था होती है।

फिलहाल पूर्ण रूप से कार्यात्मक एकमात्र अंतरिक्ष स्टेशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद है, जहां अंतरिक्ष विज्ञानी कई अनुसंधान करते हैं। यूरोपीय देशों के प्रतिनिधित्व वाली यूरोपीयन अंतरिक्ष एजेंसी, अमेरिका (नासा), जापान (जेएएक्सए), कनाडा (सीएसए) और रूस (रोसकॉसमोस) के बीच साझेदारी के तहत आईएसएस का निर्माण किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यह दुनिया का सबसे बड़ा अंतरिक्ष सहभागिता कार्यक्रम है।

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