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नोटबंदी पर बिफरे आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू, कहा- रोज सिर फोड़ रहा हूं फिर भी…

हाल ही में नायडू को मुख्‍यमंत्रियों की एक कमेटी का प्रमुख भी बनाया गया था।

Note ban, Andhra Pradesh, Chandrababu Naidu, Cash Crunch, Demonetisation, ATM, Bank, India, Jansattaआंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू। (File Photo)

अब तक नोटबंदी का पुरजोर समर्थन कर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार के इस कदम पर चिंता जताई है। नायडू ने कहा है कि वह इस बात से परेशान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए फैसले के बाद पैदा हुई कैश की किल्‍लत खत्‍म होती नहीं दिख रही। एनडीटीवी रिपोर्ट के अनुसार, विजयवाड़ा में पार्टी के एक कार्यक्रम में अपनी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के विधायकों और सांसदों से बातचीत में उन्‍होंने सोमवार को कहा, ”नोटबंदी हमारी मर्जी नहीं थी, फिर भी वह कदम उठाया गया। नोटबंदी के 40 दिन बाद भी, हमारे पूरे प्रयासों के बावजूद, अभी भी कई सारी समस्‍याएं हैं और कोई हल नजर नहीं आ रहा।” नायडू ने पीएम मोदी के ऐलान के बाद, इस कदम का क्रेडिट लेते हुए कहा था कि वह लगातार प्रधानमंत्री से भ्रष्‍टाचार खत्‍म करने के लिए उच्‍च मूल्‍य की करंसी बंद करने की वकालत कर रहे थे। हाल ही में उन्‍हें मुख्‍यमंत्रियों की एक कमेटी का प्रमुख भी बनाया गया था जिसका काम कैशलेस इकॉनमी का रोडमैप तैयार करना है। उन्‍होंने ट्वीट करके भी कहा था कि नोटबंदी ‘टीडीपी की नैतिक जीत’ है।

सोमवार का नायडू ने कहा कि पूरे देश में लोग जरूरत की चीजें खरीदने हेतु नई करंसी के लिए जूझ रहे हैं मगर बैंकों और एटीएम के खाली रहने से ऐसा नहीं कर पा रहे। उन्‍होंने कहा, ”नोटबंदी से पैदा हुई मुश्किलें निपटाने के लिए मैं रोज दो घंटे देता हूं। मैं रोज अपना सिर खपा रहा हूं मगर इस समस्‍या का कोई हल नहीं मिल रहा।” उन्‍होंने नकदी संकट की तुलना अगस्‍त, 1984 में राज्‍य के राजनैतिक संकट से की, जहां तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री एनटी रामाराव (नायडू के ससुर) के खिलाफ पार्टी के भीतर तख्‍तापलट किया गया था। उन्‍होंने कहा, ”वह संकट भी 30 दिन के भीतर सुलझा लिया गया था, जबकि इस मामले में 40 दिन बाद भी, समस्‍या बनी हुई है।”

दूसरी तरफ, मंगलवार को पूर्व वित्‍तमंत्री व वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी सरकार की आलोचना की। चिदंबरम के अनुसार, नोटबंदी के बाद से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नए नियम बना रहा है और जेटली उसे बदल रहे हैं। मंगलवार को चिदंबरम ने कहा कि नागरिकों को पता नहीं कि किसपर भरोसा करें कि क्‍योंकि दोनों अपनी साख गंवा चुके हैं।

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