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तस्लीमा आपकी बहन बन गई, तो रोहिंग्या आपका भाई नहीं बन सकता है क्या मिस्टर मोदी- ओवैसी

ओवैसी ने कहा कि भारत में बांग्लादेश के चकमा, श्रींलका के तमिल रिफ्यूजी, और चीन के सताये कई बौद्ध रिफ्यूजी रह रहे हैं तो रोहिंग्या मुसलमानों को भारत शरण क्यों नहीं दे सकता है।

लुधियाना में रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में प्रदर्शन करते भारतीय मुसलमान (Express Photo by Gurmeet Singh 12-09-17)

रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर करारा हमला बोला है। ओवैसी ने इस मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाने पर लिया और कहा कि प्रधानमंत्री जी जब बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन आपकी बहन हो सकती है तो म्यांमार के रिफ्यूजी मुसलमान आपके भाई क्यों नहीं हो सकते हैं। ओवैसी ने कहा कि जब भारत में तस्लीमा नसरीन रह सकती है तो रोहिंग्या मुसलमान क्यों नहीं रह सकते हैं। तस्लीम नसरीन 1994 से भारत में निर्वासित जीवन जी रही है। शुक्रवार 15 सितंबर को एक सभा में ओवैसी ने कहा कि भारत में बांग्लादेश के चकमा निवासी, श्रींलका के तमिल रिफ्यूजी, और तिब्बत में चीन के सताये कई बौद्ध रिफ्यूजी रह रहे हैं तो रोहिंग्या मुसलमानों को भारत शरण क्यों नहीं दे सकता है। बता दें कि भारत सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए इन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वे गृह मंत्रालय 18 सितंबर को इस बावत सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करेगी।

ओवैसी ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता चाहता है लेकिन क्या दुनिया की एक ताकत के रुप में भारत का यही रवैया रहेगा। ओवैसी ने कहा, ‘भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है लेकिन क्या वहां एक सुपर पावर के रूप में भारत का यही रवैया रहेगा।’ ‘क्या केन्द्र उन मुसलमानों को वापस भेज सकता है, आप किस कानून के तहत ऐसा करेंगे, इन रोहिंग्या मुसलमानों के पास मानवाधिकार आयोग की इजाजत का पत्र भी है।’ केन्द्र पर बरसते हुए ओवैसी ने कहा कि जो लोग अपना सब कुछ खो चुके हैं उन्हें वापस भेजना कैसी मानवता है।’

श्रीलंका के तमिलों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि इस तमिलों पर श्रीलंका में आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप था, लेकिन क्या इन्हें भारत सरकार ने वापस सौंप दिया। ओवैसी ने कहा कि ये रिफ्यूजी आज भी भारत में रह रहे हैं। ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में रह रहे चकमा समुदाय के लोगों का भी जिक्र किया। ये लोग 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के वक्त भारत आए थे, ये लोग बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी सेना के खिलाफ पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे। ओवैसी ने बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा का भी जिक्र किया जिन्हें भारत में मेहमान का दर्जा हासिल है।

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