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नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा पर AIMIM चीफ ओवैसी की टेढ़ी नजर, कहा- फिलीस्तीन क्यों नहीं जा रहे हैं पीएम

ओवैसी ने कहा इस सरकार के लिए अब फिलीस्तीन मुद्दा अहम नहीं रह गया है, जबकि देश की पिछली सरकारें फिलीस्तीन को तरजीह देती थीं, ये हमारी विदेश नीति का मूल आधार था।

दिल्ली में संसद भवन के बाहर AIMIM चीफ ओवैसी और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (EXPRESS PHOTO)

हैदराबाद के सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी ने पीएम नरेन्द्र मोदी इजरायल यात्रा पर सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का इजरायल दौरा वेस्ट बैंक और गाज़ा में इजरायल के कब्जे को पुख्ता करेगा। सोमवार (3 जुलाई को ) हैदराबाद में सांसद ओवैसी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री अपने तीन दिन के इजरायल दौरे के दौरान इजरायल अधिकृत क्षेत्रों में नहीं जा रहे हैं, जहां पहले भारतीय के नेता जा चुके हैं, जब भी भारत का कोई आधिकारिक शख्स इजरायल गया है…इजरायल से हमारा संबंध रहा है लेकिन हमने फिलीस्तीन को भी अपना समर्थन दिया है।’ ओवैसी ने कहा कि इसलिए मैं कहता हूं कि पीएम मोदी द्वारा अधिकृत इलाकों में नहीं जाने से वेस्ट बैंक और गाजा में इजरायल का कब्जा पुख्ता होगा।

AIMIM चीफ ने आरोप लगाया कि इस सरकार के लिए फिलीस्तीन का मुद्दा अब अहमियत नहीं रखता है, जबकि भारत की पिछली सरकारों के लिए ऐसा नहीं था। ओवैसी ने कहा इस सरकार के लिए अब फिलीस्तीन मुद्दा अहम नहीं रह गया है, जबकि देश की पिछली सरकारें फिलीस्तीन को तरजीह देती थीं, ये हमारी विदेश नीति का मूल आधार था। ओवैसी ने दावा किया कि इजरायल से मांगये गये साजो सामान जैसे कि बॉर्डर सेंसर, ड्रोन्स देश की रक्षा करने में सफल नहीं रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर केन्द्र ने उन कंपनियों को ठेका क्यों दिया जिसे पहले ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 4 जुलाई से तीन दिनों की इजरायल यात्रा पर हैं। पीएम मोदी ने इजरायली समाचार पत्र ‘इजरायल हायोम’ से एक साक्षात्कार में कहा कि उनके तीन दिवसीय इजरायल दौरे का अपना महत्व है और यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या इजरायल तथा भारत आतंकवाद के एक जैसे खतरे का सामना कर रहे हैं? मोदी ने कहा, “आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है। इससे न तो भारत और न ही इजरायल सुरक्षित है। हमारे बीच पूर्णतया समझौता है कि जो तत्व निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा की साजिश रचते हैं, उन्हें फलने-फूलने की मंजूरी नहीं देनी चाहिए।” प्रधानमंत्री ने कहा, “आतंकवाद को किसी खास मजहब से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भारत तथा इजरायल आतंकवाद की बुराई से लड़ने के लिए पहले से अधिक सहयोग कर सकते हैं और एक-दूसरे के प्रयास का पूरक बन सकते हैं।”

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