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किताब में वैश्यों को ‘तस्कर’ कहने पर लेखक कांचा इल्लैया को मिली जीभ काटने की धमकी, कराई FIR

वैश्य संगठन डॉ. कांचा इल्लैया की किताब 'सामाजिका स्मगलुरलु कोमाटोल्लु' (वैश्य लोग सामाजिक तस्कर हैं) का विरोध कर रहे हैं।

लेखक और बुद्धिजीवी डॉ. कांचा इल्लैया। (File Photo)

लेखक और बुद्धिजीवी डॉ. कांचा इल्लैया को ‘जीभ काट देने’ की धमकी मिली है। धमकी मिलने के बाद डॉ. कांचा इल्लैया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। हैदराबाद ओस्मानिया यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई शिकायत में उन्होंने कहा कि उन्हें रविवार से लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं, फोन उठाने पर उन्हें धमकी दी जा रही है और अपशब्द बोले जा रहे हैं। डॉ. इल्लैया ने एक किताब लिखी थी, जिसमें उन्होंने वैश्य समाज के लोगों को ‘ सामाजिक तस्कर’ बताया था। इसके बाद से उनका विरोध हो रहा है।

उन्होंने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में लिखा है, ’10 सितंबर से मुझे अज्ञात लोगों के लगातार फोन आ रहे हैं, जब मैं फोन उठाता हूं तो वो लोग मुझसे गंदे तरीके से बात कर रहे हैं। दोपहर में रामकृष्णन के नेतृत्व वाले संगठन आर्य-वैश्य संगम टीवी चैनलों में पर मेरी निंदा कर रहा है। शाम को टीवी9 पर रमाना ने कहा कि ‘वे लोग मेरी जीभ काट देंगे।’ आंध्र ज्योति के मुताबिक रविवार को मेरे पुतले फूंके गए हैं और मुझे अपशब्द कहे गए हैं। आर्य वैश्य नेता कचम सत्यनारायण, राचामल्ला वेंकटेश्वरलु और बुरुगु रविकुमार और अन्य लोग मेरे खिलाफ ये डराने वाली गतिविधियां कर रहे हैं।’

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पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत की कॉपी। (Photo Source: Indian Express)

साथ ही उन्होंने लिखा है, ‘इन धमकी और गाली वाली कॉल और मैसेज से खतरा महसूस हो रहा है। अगर मेरे साथ कुछ भी होता है तो ये लोग इसके लिए जिम्मेदार होंगे। ये लोग लगातार मुझे कॉल कर रहे हैं। इस वजह से मैं एक कॉल भी किसी को नहीं कर पा रहा हूं, क्योंकि मेरे फोन पर उनकी कॉल लगातार आ रही हैं। हालांकि, मुझे यह भी मालूम है कि कुछ मीडिया के लोग मुझे कॉल कर रहे होंगे, लेकिन मैं उनकी कॉल भी नहीं उठा पा रहा हूं। लेकिन जो दूसरे नंबर हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’

वैश्य संगठन डॉ. कांचा इल्लैया की किताब ‘सामाजिका स्मगलुरलु कोमाटोल्लु’ (वैश्य लोग सामाजिक तस्कर हैं) का विरोध कर रहे हैं। वैश्य संगठनों ने शिकायत की है कि किताब का शिर्षक और इसका कुछ हिस्सा हमारे समाज के खिलाफ लिखा गया है। इन संगठनों ने मांग की है कि इस किताब को तुरंत वापस लिया जाए।

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