ताज़ा खबर
 

400 साल पुरानी मस्जिद में रख दी भगवान राम की मूर्ति, पुलिस ने हटाई

गोलकुंडा किले के समीप स्थित शैकपेट मस्जिद में कुछ उपद्रवियों ने भगवान राम की मूर्ति रख दी थी। पुलिस ने अविलंब कार्रवाई करते हुए मूर्ति को वहां से हटा दिया। हालात पर नियंत्रण रखने के लिए घटनास्थल पर पुलिस पिकेट लगा दिया गया है।

। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

तेलंगाना में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश का मामला सामने आया है। उपद्रवियों ने गोलकुंडा किले के समीप स्थित तकरीबन 400 साल पुरानी एक मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति रख कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए और स्थिति को संभाला। पुलिस ने मस्जिद से भगवान राम की मूर्ति को हटाया। यह मामला ऐतिहासिक शैकपेट मस्जिद से जुड़ा है। ‘द न्यूज मिनट’ के अनुसार, उपद्रवियों ने 1 मई को सुबह में इस हरकत को अंजाम दिया था। एक स्थानीय युवक ने पुलिस को मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति होने की जानकारी दी थी। कारवां विधानसभा क्षेत्र के विधायक कौशर मोहिउद्दीन को भी इसके बारे में सूचित किया गया था, ताकि हालात को नियंत्रण में रखा जा सके। इसके अलावा मौके पर पुलिस पिकेट भी स्थापित कर दिया गया, ताकि शांति-व्यवस्था को बरकरार रखा जा सके। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद से इलाके में तनाव फैल गया था।

पांच आरोपियों की हुई पहचान: पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। इनमें से पांच आरोपियों की पहचान कर ली गई है। बीर सिंह, योगेंदर सिंह, कृपाल सिंह, नवीन सिंह और माया बाई को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि ये पांचों वक्फ बोर्ड के अधिकार वाले मस्जिद में घुसकर मूर्ति रख दी और वक्फ की संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से पूजा-अर्चना करने की कोशिश की थी। मजलिस बचाओ तहरीक नामक संस्था ने इस घटना की निंदा की और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कारवां विधायक मोहिउद्दीन ने कहा, ‘हमलोग बाउंड्री वॉल को ऊंचा कर मस्जिद पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। मैंने वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से बात कर बाउंड्री वॉल बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने दो-तीन दिनों में काम शुरू करने का भरोसा दिलाया है।’ बता दें कि इस मस्जिद का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। पुलिस ने हालात को नियंत्रण में बताया है।

17वीं सदी में किया गया था निर्माण: शैकपेट मस्जिद का निर्माण कुतुबशाही के शासनकाल में 17वीं सदी में किया गया था। ऐतिहासिक मस्जिद आंध्र प्रदेश पुरातन ऐतिहासिक स्मारक और पुरातत्व स्थल अधिनियम के तहत एक संरक्षित स्मारक है। इसके बावजूद रखरखाव और उचित निगरानी का अभाव है, जिसके कारण इस तरह की घटना सामने आई।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App