तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि टॉप माओवादी कमांडर तिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवूजी के आत्मसमर्पण के बाद भाकपा (माओवादी) का संगठन नेतृत्वहीन हो चुका है। डीजीपी ने कहा कि यह संगठन लगभग बिखर चुका है। रेड्डी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेलंगाना में नक्सली आंदोलन लगभग अपने अंत की ओर है।

डीजीपी से जब यह पूछा गया कि भाकपा (माओवादी) का नेतृत्व कौन कर रहा है तो उन्होंने बताया, “कोई भी इसका नेतृत्व नहीं कर रहा है। यह लगभग बिखर चुका है। देवूजी को महासचिव बनाया जाना था लेकिन केंद्रीय समिति की बैठक नहीं हो सकी।”

डीजीपी ने बताया, “चूंकि बैठक नहीं हो सकी इसलिए किसी को भी महासचिव नहीं चुना गया। आज की तारीख में माओवादी पार्टी नेतृत्वहीन, दिशाहीन और बिखरी हुई है।” डीजीपी ने कहा कि तेलंगाना के 11 माओवादी अब भी अंडरग्राउंड हैं, जिनमें मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ ​​गणपति भी शामिल है।

डीजीपी का यह बयान ऑपरेशन कगार के तहत मिली बड़ी सफलता के बाद आया है। ऑपरेशन कगार में थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवूजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

हथियार डाल दें अंडरग्राउंड कार्यकर्ता

रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना पुलिस सभी बचे हुए अंडरग्राउंड भाकपा (माओवादी) कार्यकर्ताओं से हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने का आग्रह कर चुकी है। उन्होंने दोहराया, “भाकपा (माओवादी) पार्टी और आंदोलन में अब कुछ भी नहीं बचा है। तेलंगाना में गति पकड़ने वाला यह आंदोलन लगभग अपने अंत की ओर है। मैं उनसे फिर से सामने आकर आत्मसमर्पण करने की अपील करता हूं।”

‘भारत में सशस्त्र संघर्ष विफल हो गया’

भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​सोनू ने बीते साल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण कर दिया था। राव का कहना था कि भाकपा (माओवादी) एक असफल प्रयोग साबित हुआ और हथियार डालना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता था। क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।