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हड़तालियों को तगड़ा झटका, तेलंगाना सरकार ने दशहरे पर छीन ली 48 हजार कर्मचारियों की जॉब

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने निगम के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इसके बाद घोषणा की गई कि निगम के पास अब सिर्फ 1200 कर्मचारी हैं, इनमें वो शामिल हैं जिन्होंने हड़ताल में शिरकत नहीं की

तेलंगाना सीएम केसीआर फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस
तेलंगाना में केसीआर (Telangana CM KCR) की सरकार ने अचानक 48 हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया। रविवार (6 अक्टूबर) को बड़ा कदम उठाते हुए तेलंगाना राज्य परिवहन निगम (TSRTC) ने अरसे से लंबित अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे 48 हजार कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हड़ताली कर्मचारियों की तरफ से की जा रही ब्लैकमेलिंग से प्रभावित नहीं होने वाले और इस तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘अब सिर्फ 1200 कर्मचारी हैं’: राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने निगम के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इसके बाद घोषणा की गई कि निगम के पास अब सिर्फ 1200 कर्मचारी हैं, इनमें वो शामिल हैं जिन्होंने हड़ताल में शिरकत नहीं की और शनिवार (5 अक्टूबर) की शाम 6 बजे से पहले अपने काम पर लौट आए। बता दें कि इस समय तक सरकार ने सभी कर्मचारी संगठनों से हड़ताल खत्म करने के लिए कहा था।

ये हैं कर्मचारियों की मांगेंः निगम के करीब 49,340 कर्मचारी तेलंगाना रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की जॉइंट एक्शन कमेटी द्वारा शनिवार को बुलाई गई हड़ताल में शामिल हुए थे। इस कमेटी ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश की तरह रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन का सरकार में विलय करने की मांग की थी। आंध्र प्रदेश में निगम के कर्मचारियों को सरकारी कर्मियों की तरह सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा अप्रैल 2017 से लंबित वेतन समीक्षा करने और काम का बोझ कम करने के लिए निगम में नए कर्मचारियों की नियुक्तियों की भी मांगें शामिल हैं।

खस्ताहाल है ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशनः सीएमओ की तरफ से जारी आधिकारिक रिलीज में हड़ताल से तय समय तक वापस न लौटने वालों की नौकरी खत्म करने की बात कही गई। एक अधिकारी ने कहा, ‘निकाले गए कर्मचारियों से बातचीत करने या उन्हें वापस रखे जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। जब निगम 1200 करोड़ रुपए के नुकसान और करीब 5 हजार करोड़ के कर्ज से जूझ रहा था, तब हड़ताल करके कर्मचारियों ने बड़ा अपराध किया है।’

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साथ में किया एक और ऐलानः इसके साथ ही केसीआर ने आरटीसी के आंशिक निजीकरण के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा, ‘आरटीसी की आधी बसें प्राइवेट होंगी। उन्हें परमिट दिए जाएंगे।’ केसीआर ने तत्काल कदम उठाते हुए ढाई हजार बसों को लीज पर लेने और करीब 4114 प्राइवेट बसों को परमिट देने का फैसला लिया।

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