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केंद्र सरकार से खफा टीडीपी मंत्री देंगे इस्तीफा, चंद्रबाबू नायडू ने बताया पहला कदम

तेदेपा को शांत करने के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली आगे आए और कहा कि केंद्र सरकार राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के समान वित्तीय मदद देने को प्रतिबद्ध है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति से धन की मात्रा नहीं बढ़ सकती है।

Author March 8, 2018 05:11 am
आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और पीएम मोदी की फाइल फोटो।

आंध्र को विशेष दर्जे वाले राज्य के समान आर्थिक मदद के वित्त मंत्री अरुण जेटली के वादे का बुधवार को तेलुगु देशम पर असर नहीं पड़ा। तेदेपा नेता और आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने देर रात एलान कर दिया कि उनके दो मंत्री अशोक गजपति राजू और वाइएस चौधरी गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से अलग हो सकते है। उन्होंने कहा यह पहला कदम है। हम बाद में आगे के कदम उठाएंगे। विजयवाड़ा में बुधवार रात चंद्रबाबू नायडू ने अपनी पार्टी के दो केंद्रीय मंत्रियों से इस्तीफा देने को कहा। केंद्रीय बजट में राज्य को कथित रूप से नजरअंदाज करने को लेकर तेदेपा और भाजपा के बीच संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच यह ताजा घटनाक्रम हुआ है। नायडू ने कहा कि उनकी पार्टी राजग से बाहर आ जाएगी, लेकिन दलों से जुड़े मामलों पर बाद में फैसला किया जाएगा। आपातकालीन बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा, यह पहला कदम है। हम बाद में आगे के कदम उठाएंगे। तेदेपा प्रमुख ने कहा कि उन्होंने इस्तीफे के फैसले के बारे में शिष्टाचार के तौर पर जानकारी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने का प्रयास किया। लेकिन उनसे बात नहीं हुई। पार्टी के इस फैसले से कुछ घंटे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केंद्र आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दे सकता, लेकिन समान कोष के साथ विशेष पैकेज दे सकता है।

तेदेपा को शांत करने के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली आगे आए और कहा कि केंद्र सरकार राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के समान वित्तीय मदद देने को प्रतिबद्ध है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति से धन की मात्रा नहीं बढ़ सकती है। जेटली ने कहा कि चार साल पहले राज्य के विभाजन के समय जो भी वादे किए गए थे, उनकी सरकार उन सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगी। जेटली ने कहा कि 2014 में राज्य विभाजन के समय इस प्रकार की श्रेणी जरूर थी। लेकिन 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद इस तरह के दर्ज को संवैधानिक रूप से केवल पूर्वोत्तर व तीन पहाड़ी राज्यों तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों के अलावा किसी अन्य राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना संवैधानिक रूप से संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश को भी उतना ही धन उपलब्ध करवाएगी जितना विशेष दर्ज वाले राज्य को मिलता है।

गौरतलब है कि विशेष श्रेणी वाले राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए जरूरी धन का 90 फीसद हिस्सा केंद्र सरकार देती है। वहीं सामान्य श्रेणी के राज्यों में केंद्र का हिस्सा केवल 60 फीसद होता है। बाकी का धन राज्य सरकारें वहन करती हैं। जेटली ने कहा कि आंध्र प्रदेश के लिए केंद्र विभिन्न बाहरी एजंसियों जैसे दूसरे माध्यमों से योजना कोष का 90 फीसद हिस्सा देने को प्रतिबद्ध है जो कि विशेष राज्य के दर्जे वाले राज्य को प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस तरह के धन को नाबार्ड के जरिए लगवाने के राज्य सरकार के सुझाव को स्वीकार करने पर विचार करना चाहती है। राजग से हटने की तेदेपा की धमकी के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा, राजनीतिक मुद्दों से धन में बढ़ोतरी नहीं की जा सकती क्योंकि केंद्र के पास अनाप-शनाप धन उपलब्ध नहीं है।

जेटली के अनुसार, पिछले महीने की बैठक में केंद्र ने एक विशेष उद्देश्यीय कोष (एसपीवी) बनाने का सुझाव दिया था जहां नाबार्ड धन दे सके ताकि उस राज्य का राजकोषीय घाटा प्रभावित नहीं हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस तरह से सहायता दिए जाने के तौर-तरीकों पर अभी अपनी राय नहीं बताई है। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय आंध्र प्रदेश को जिन संस्थानों का वादा किया गया था उनकी स्थापना का काम चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सत्ता में आने पर राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया है। इस बारे में जेटली ने कहा, मुझे 14 वें वित्त आयोग की संवैधानिक व्यवस्थाओं का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि विशेष दर्जे वाले राज्य के समकक्ष आंध्र प्रदेश को जो धन मिल सकता था, वह हम उसे देने को प्रतिबद्ध हैं। राज्य सरकार के राजस्व घाटे को पूरा करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि केंद्र उसे 4,000 करोड़ रुपये दे चुका है और बकाया केवल 138 करोड़ रुपए का है।

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