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न जाति, न धर्मः स्नेहा के नाम हुआ बड़ा रिकॉर्ड, देश की पहली शख्स जिसके पास ऐसा अनोखा प्रमाण पत्र

तमिलनाडु सरकार ने स्नेहा को आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया है जिसमें उन्हें धर्म और जाति रहित महिला माना गया है। ऐसा माना जा रहा है कि स्नेहा देश की पहली ऐसी नागरिक हैं जिन्हें ऐसा सर्टिफिकेट हासिल हुआ है।

फोटो सोर्सः फेसबुक

तमिलनाडु 35 वर्षीय एमए स्नेहा कानूनी रूप से धर्म और जाति रहित प्रमाण पत्र पाने वाली देश की पहली नागरिक बन गई हैं। पेशे से वकील स्नेहा तमिलनाडु के तिरुपथुर की रहने वाली हैं। उन्होंने आज तक कभी भी जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल-कॉलेज या अन्य किसी भी दस्तावेज में धर्म और जाति का कॉलम नहीं भरा। स्नेहा ही नहीं उनका पूरा परिवार बिना किसी जाति-धर्म पहचान के तिरुपथुर में काफी सालों में रह रहा है। स्नेहा और उनके परिजनों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि उन्हें किसी जाति धर्म से निकाला गया है, बल्कि इसलिए है क्योंकि उनका परिवार नास्तिक है और जाति-धर्म की बातों पर यकीन नहीं करता।

स्नेहा के नाम हुआ ये अनोखा रिकॉर्डः कुछ समय पहले ही तमिलनाडु सरकार ने स्नेहा को आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया है जिसमें उन्हें धर्म और जाति रहित महिला माना गया है। ऐसा माना जा रहा है कि स्नेहा देश की पहली ऐसी नागरिक हैं जिन्हें ऐसा सर्टिफिकेट हासिल हुआ है। स्नेहा ने प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। उनका कहना था कि जब सरकार जाति प्रमाण पत्र जारी कर सकती है तब वह मुझे जाति-धर्म से मुक्त व्यक्ति का प्रमाणपत्र क्यों नहीं दे सकती।

माता- पिता ने ऐसे सोचा था स्नेहा का नामः स्नेहा के माता-पिता ने बताया कि उन्होंने स्नेहा का नाम तेलगांना में पुलिस कस्टडी में मारी गई एक लड़की स्नेहा के नाम पर रखा था। स्नेहा ने बताया कि उनके माता-पिता, बहन, पति उनकी बेटियां बिना किसी जाति और धर्म के रहती हैं। उन्होंने बताया, ‘स्कूल में जब भी मुझसे और मेरी बहनों से हमारे धर्म और जाति के बारे में पूछा जाता था तो हमारा एक ही जवाब होता था नो कास्ट-नो रिलिजियन यानी न जाति, न धर्म।’ स्नेहा के पति पार्थिबाराजा ने, ‘मेरे ससुर पीवी आनंदकृष्णन और सासु मनीमोझी दोनों ही वकील थे और अलग-अलग जातियों से संबंधित थे। वे तर्कवादी और कम्युनिस्ट विचारधारा के थे।’

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स्नेहा के बच्चों के नाम भी बेहद खासः स्नेहा और उनके पति पार्थिबाराजा ने अपनी तीनों बेटियों के नाम बौद्ध, ईसाई और मुस्लिम रखे हैं। इनमें से एक का नाम आधीराई नसरीन है। बाकी दो के नाम अथिला ईरानी और आरिफा जेस्सी है। स्नेहा कहती हैं कि वो नास्तिक हैं और उन्हें उनके सिद्धांतों पर गर्व है। उन्हें विश्वास है कि उनकी बेटियां भी इन सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ेंगी।

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