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तमिलनाडुः एक दशक में अज्ञात समुदाय की आबादी 217% तक बढ़ी, उधर, भागवत ने कहा- 1930 से चल रही मुस्लिम आबादी बढ़ने की कवायद

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में बंगाल, असम और सिंध को भी पाकिस्तान बनाने की योजना थी। ये योजना पूरी तरह कामयाब नहीं हुई, पर विभाजन होकर पाकिस्तान बन गया।

लेखक नानी गोपाल महंत की पुस्तक विमाेचन कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। (फोटो- पीटीआई)

तमिलनाडु में पिछले एक दशक (2001 से 2011 तक) में एक खास वर्ग की आबादी में 217.78 फीसदी का इजाफा हुआ। हालांकि ये कौन धर्म के लोग हैं, यह नहीं बताया गया है। मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कुछ और डेटा शेयर करते हुए बताया कि इस दौरान बुद्धिस्ट समुदाय की वृद्धि दर 107 फीसदी रही। एक समुदाय, जिसके धर्म का खुलासा नहीं किया गया, उसमें 2001 में 5,393 से बढ़कर 2011 में 1,88,586 हो जाएगी।

2001 की जनगणना में, सिख समुदाय को जोड़ने वाले डेटा ने 2001 में 9545 से 2011 में 14601 तक तमिलनाडु में 52.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। मुस्लिम समुदाय तमिलनाडु में बढ़ी हुई जनसंख्या के मामले में 2001 में 3470647 से 2011 में 4229479 तक 21.86 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तीसरे स्थान पर था, उसके बाद ईसाई (16.73 प्रतिशत) 2001 में 3785060 से बढ़कर 2011 में 44,18331 हो गए।

उधर, संघ प्रमुख ने बुधवार को कहा कि हिंदुस्तान में 1930 से योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिमों की संख्या बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि भारत में बंगाल, असम और सिंध को भी पाकिस्तान बनाने की योजना थी। ये योजना पूरी तरह कामयाब नहीं हुई, पर विभाजन होकर पाकिस्तान बन गया।

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